ज्ञानवापी: मुगल बादशाहों के पास सिर्फ जजिया का अधिकार, संपत्ति पर नहीं करते थे कब्जा; वादमित्र ने दी दलील
ज्ञानवापी प्रकरण में अपर जिला जज (14वें) सुधाकर राय की कोर्ट में गुरुवार को मुख्तार अंसारी को पक्षकार बनाने के लिए निगरानी अर्जी पर सुनवाई हुई। कोर्ट में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से बहस पूरी कर ली गई। अब अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी। वाद मित्र ने कोर्ट में दलील दी कि पक्षकार बनाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने दलील दी कि विवादित जायदाद वक्फ की संपत्ति कभी नहीं रही है। न ही औरंगजेब उस संपत्ति का मालिक था। क्योंकि मुगल काल में जब कोई बादशाह राज्य पर कब्जा करता था तो वह सभी भूमि का मालिक नहीं होता था। उसे सिर्फ लगान लेने का अधिकार था। जिसे जजिया कर कहते थे। जबकि मुसलमान पर जो भी कर लगता था उसे ओसर कहते थे। बादशाह का भूमि का फसल में एक तिहाई हिस्सा होता था। उस भूमि का मालिक सिर्फ जोतने वाला होता था। इसलिए औरंगजेब, अकबर आदि बादशाह जमीन मालिकों से भूमि को खरीद कर अपने किले बनाए। अगर वह जमीन का मालिक होता तो बादशाह को खरीदने की जरूरत नहीं होती। उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 1982 में एक विधि व्यवस्था में वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर को वक्फ संपत्ति को अवैध माना था। इसलिए इस मामले में पक्षकार बनाने का कोई औचित्य नहीं है। निगरानी कर्ता की अर्जी खारिज करने की गुहार लगाई गई। इस मामले में दोनों पक्षों में कई बार बहस हो गई है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 28, 2025, 23:45 IST
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