Rajasthan News: मानगढ़ के बलिदान से गोविंद गुरु के संदेश तक, अब डिजिटल होगी वागड़ की शौर्यगाथा

वागड़ की गौरवशाली सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा ने वागड़ शौर्य गाथा नाम से महत्वाकांक्षी अभियान शुरू करने की पहल की है। इस अभियान के तहत जननायक गोविंद गुरु, मानगढ़ के अमर बलिदानी, संतों, समाज सुधारकों, लोकनायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और वागड़ की अन्य विशिष्ट विभूतियों के जीवन, संघर्ष, विचार और योगदान को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा। गोविंद गुरु के जीवन पर बनेगी लघु फिल्म वागड़ शौर्य गाथा अभियान के केंद्र में जननायक गोविंद गुरु का व्यक्तित्व और कृतित्व रहेगा। भगत आंदोलन के माध्यम से जनजातीय समाज में सामाजिक सुधार, संगठन, शिक्षा और आत्मसम्मान की चेतना जगाने वाले गोविंद गुरु के जीवन एवं संघर्ष पर आधारित लघु फिल्म तैयार की जाएगी। उनके विचारों और संदेशों को लेजर शो, डिजिटल प्रदर्शनी और दृश्य-श्रव्य प्रस्तुतियों के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचाने की योजना है। मानगढ़ के बलिदान को मिलेगी डिजिटल अभिव्यक्ति अभियान का प्रमुख केंद्र मानगढ़ धाम और वर्ष 1913 का ऐतिहासिक बलिदान रहेगा। मानगढ़ की पहाड़ी पर जनजातीय समाज के लोगों के बलिदान, अधिकारों, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय के संघर्ष को शोध एवं दस्तावेजीकरण के जरिए सामने लाया जाएगा। विश्वविद्यालय डिजिटल सामग्री, वृत्तचित्र, प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम तथा आधुनिक मल्टीमीडिया प्रस्तुतियां तैयार करेगा। त्रि-आयामी तकनीक के जरिए मानगढ़ की ऐतिहासिक गाथा को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और अनुभवात्मक बनाने की योजना है। वागड़ की दूसरी विभूतियों का भी होगा डिजिटल संकलन अभियान को गोविंद गुरु और मानगढ़ तक सीमित नहीं रखा जाएगा। वागड़ के संतों, लोकनायकों, समाज सुधारकों, स्वतंत्रता सेनानियों और लोकचिंतकों के जीवन एवं कार्यों का भी व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। संबंधित सामग्री को डिजिटल अभिलेख, पॉडकास्ट, लघु फिल्मों, ई-संग्रहालय और विशेष ज्ञान श्रृंखलाओं के रूप में तैयार किया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में डिजिटल ज्ञान केंद्र विकसित करने की भी योजना है। एआई से इतिहास को देखने-सुनने का मिलेगा अनुभव परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। इससे इतिहास को केवल पढ़ने के बजाय देखने, सुनने और अनुभव करने योग्य बनाया जा सकेगा। डिजिटल माध्यमों के जरिए विद्यार्थी अपने क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति, लोक परंपराओं और महापुरुषों से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ सकेंगे। यह भी पढ़ें:जेन अल्फा के सामने दो दिन बाद प्रशासन झुका, छह मांगों पर बनी सहमति विश्वविद्यालय देगा अभियान को संस्थागत सहयोग अभियान को स्थायी स्वरूप देने के लिए विश्वविद्यालय अपने वार्षिक बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान करेगा। शोध, सामग्री संकलन, डिजिटलीकरण, फिल्म निर्माण, प्रकाशन, अभिलेखीकरण, डिजिटल प्रदर्शनी और प्रसार गतिविधियों के लिए संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। नई पीढ़ी में स्वाभिमान और सामाजिक जिम्मेदारी जगाना उद्देश्य विवि के शोध निदेशक नरेंद्र पानेरी के अनुसार, वागड़ शौर्य गाथा केवल अतीत की स्मृतियों को सहेजने की पहल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में स्वाभिमान, सेवा, समरसता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करने का व्यापक प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह अभियान वागड़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को नई पहचान देने तथा इसकी गौरवगाथा को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 15, 2026, 02:28 IST
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