सावन में पंजाबी रंग में रंगा अमृतसर, महिलाओं ने गिद्धा और झूलों के साथ मनाया उत्सव
सावन के पावन महीने में तीज पर्व के अवसर पर अमृतसर में पंजाबी संस्कृति की रंगीन छटा देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक पंजाबी परिधान, परांदे, फुलकारी और पारंपरिक आभूषण पहनकर कार्यक्रम में शामिल हुईं। महिलाओं ने गिद्धा डाला, लोक बोलियां गाईं, झूलों का आनंद लिया, मेहंदी रचाई और सग्गी-फूल सजाकर तीज की खुशियां मनाईं। पूरे आयोजन में पंजाबी लोक संस्कृति की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मनमीत कौर ने कहा कि तीज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पंजाब की बेटियों और बहनों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला सांस्कृतिक पर्व है। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में सावन के दौरान झूले पड़ते थे और विवाहित बेटियां मायके आकर सहेलियों के साथ तीज मनाती थीं। आज यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है, इसलिए ऐसे आयोजन कर नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कवलजीत कौर ने बताया कि तीन वर्ष पहले उन्होंने अपनी सहेलियों के साथ मिलकर इस आयोजन की शुरुआत की थी, जो अब एक परंपरा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में गिद्धा, लोकगीत और बोलियों के साथ पारंपरिक खेल भी आयोजित किए जाते हैं, ताकि हर आयु वर्ग की महिलाएं इसमें भाग ले सकें। उन्होंने कहा कि आधुनिक और पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच पंजाबी विरासत को जीवित रखना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम में महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि पंजाबी संस्कृति उनकी पहचान है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हर पंजाबी की जिम्मेदारी है। गिद्धे की धुनों, लोक बोलियों और झूलों की रौनक ने सावन के इस उत्सव को यादगार बना दिया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 04, 2026, 11:03 IST
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