हिसार में सीएंडडी वेस्ट प्लांट 5 साल बाद भी नहीं हुआ चालू, स्वच्छ सर्वेक्षण में कटेंगे निगम के नंबर
स्वच्छ सर्वेक्षण में अव्वल लाने के लिए नगर निगम अधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। दीवारों से लेकर सड़कों, गलियों से पार्काें तक सभी को चमकाया जा रहा है। भवन निर्माण मलबा (सीएंडडी वेस्ट) निस्तारण की योजना स्वच्छ सर्वेक्षण में अंक कटवा सकती है। जिसका निगम की स्वच्छता रैंकिंग पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। यह योजना पांच सालों से सिरे नहीं चढ़ पाई है। शहर के बाहरी हिस्सों में खाली भूखंडों और सड़क किनारे भवन निर्माण सामग्री के मलबे के ढेर लग रहे हैं। नगर निगम ने दिसंबर 2020 में सातरोड के पास साउथ बाईपास किनारे करीब पांच एकड़ जमीन पर सीएंडडी वेस्ट प्लांट स्थापित किया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन मेयर गौतम सरदाना ने किया। योजना यह थी कि प्लांट में आने वाले भवन निर्माण मलबे को री-साइकिल कर इंटरलॉकिंग टाइलें तैयार की जाएंगी और इन टाइलों का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा। अमर उजाला संवाददाता ने सोमवार को प्लांट पर पहुंच पर देखा तो प्रवेश द्वार पर लगा पहचान बोर्ड गायब मिला। प्लांट में भवन निर्माण मलबा नाममात्र का ही था, जबकि गोबर के बड़े-बड़े ढेर पड़े मिले। यहां मलबा निस्तारण का काम ही नहीं हो रहा। मलबे के निपटान की कोई प्रभावी व्यवस्था न होने के कारण शहर की कई सड़कों, सेक्टरों और कॉलोनियों में खाली प्लाटों में मलबे के ढेर लगे हुए हैं। साउथ बाईपास किनारे, सेक्टर 14-15, 27 और ऋषिनगर क्षेत्र में भी सड़कों व प्लॉटों के पास निर्माण सामग्री का मलबा खुले में पड़ा है। नगर निगम ने मलबे के उठान के लिए शुल्क तय कर रखा है। कोई व्यक्ति निर्माण सामग्री का मलबा उठवाना चाहता है, तो उसे निगम में 700 रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से जमा करवाने होते हैं। इसके बाद निगम की ओर से मलबे को उठाकर सीएंडडी वेस्ट प्लांट तक पहुंचाया जाना तय है, मगर यह प्रक्रिया भी केवल कागजों तक सीमित है। खुले में मलबा डालने से स्वच्छ सर्वेक्षण में कटते हैं अंक भवन निर्माण सामग्री का मलबा खुले में डालने से न केवल शहर की छवि धूमिल होती है, बल्कि स्वच्छ सर्वेक्षण में भी नगर निगम के अंक कटते हैं। ठोस अपशिष्ट की तरह मलबे का भी वैज्ञानिक निपटान जरूरी है, तभी शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान मिल सकेगा। अप्रैल महीने में दूसरे पखवाड़े में स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम का शेड्यूल प्रस्तावित किया गया है। निपटान के लिए भी बनेगी नई व्यवस्था निगम अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में निगम प्रतिदिन 40 मीट्रिक टन मलबा उत्पन्न हो रहा है । एकत्रीकरण और उठान का रेट निर्धारित किया गया है। चयनित एजेंसी शहर से मलबा एकत्र कर प्लांट तक पहुंचाएगी। निगम की फाइनेंस कमेटी से मंजूरी के बाद इस काम को शुरु कराया जा रहा है। जिसके लिए 2.69 करोड़ रुपये का टेंडर मंजूर किया गया था। नगर निगम की ओर से कचरा निस्तारण के लिए प्लांट भी मंजूर किया गया है। जिसमें कचरे से बिजली तैयार की जाएगी। सीएम नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान की गई थी। इस प्लांट के लिए तीन महीने में रिपोर्ट तैयार की जानी है। निगमों के इस प्रोजेक्ट के लिए सीनियर आईएएस अधिकारियों की कमेटी पूरी डीपीआर तैयार करेगी। अभी सीएंडडी वेस्ट प्लांट में प्रोसेसिंग के लिए जल्द ही एस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद टेंडर लगाकर एजेंसियों को आमंत्रित किया जाएगा। निगम की ओर से एजेंसी तय किए जाने के बाद टाइल निर्माण का कार्य शुरु कराया जाएगा। -नीरज कुमार, आयुक्त, निगम।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 07, 2026, 09:01 IST
हिसार में सीएंडडी वेस्ट प्लांट 5 साल बाद भी नहीं हुआ चालू, स्वच्छ सर्वेक्षण में कटेंगे निगम के नंबर #SubahSamachar
