मेरा गांव, मेरी शान: टिटौली गांव में 12 साल से पंचायत घर का निर्माण अधूरा, पहलवानोंं के गांव में पेयजल समस्या, घरों में तीसरे दिन आ रहा पानी

बुनियादी सुविधाओं के साथ ग्रामीण विकास कराने में पंचायतों की अहम भूमिका होती है। लेकिन टिटौली में अब तक भी अपना पंचायत घर नहीं है। गांव में पंचायत घर निर्माण का कार्य 12 साल से अधर में लटका हुआ है। जो अब पशुओं का आश्रय स्थल बना हुआ और ग्राम पंचायत की बैठकें चौपालों में होती है। रोहताश, संजय, शमशेर, राहुल, रविंद्र, नवीन, हरि कृष्ण आदि ग्रामीणों का कहना है कि इसको लेकर अनेक बार अधिकारियों व नेताओं तक गुहार लगाई गई है लेकिन इसका निर्माण आगे नहीं बढ़ा है और यह यह भवन ग्राम विकास के दावों को आइना दिखा रहा है। इतना ही नहीं पांच अंतरराष्ट्रीय पहलवानोंं के इस गांव में पेयजल समस्या भी गंभीर रूप लिए हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके घरों में तीसरे दिन पानी आ रहा है। जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। गांव में दो जलघर है लेकिन उनमें नहर से पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में ग्रामीणों को पानी के टैंकर मंगाकर काम चलाना पड़ रहा है। मंत्री तक शिकायत के बाद पेयजल आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ है। गांव में 7 तालाब हैं लेकिन उनमें गांव का गंदा पानी जा रहा है। लाचार व्यवस्था के चलते जोहड़ों के इसी पानी को पशु पी रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में सड़क व खेतों के रास्ते भी दुरुस्त नहीं हैं। गांव में बिजली भी आठ घंटे आती है। रात को बिजली किल्लत होने से परेशानी और बढ़ जाती है। वर्षों बाद भी गांव की सामूहिक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 26, 2026, 20:24 IST
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