जींद के मालवी गांव की सुख-शांति और विकास को लेकर सरपंच ने शुरू की तपस्या

एक ओर जहां तपती गर्मी में साधु धुनों के बीच बैठकर तपस्या करते हैं वहीं दुसरी ओर मालवी गांव में गांव की सुख-शांति, समृद्धि और विकास की कामना को लेकर गांव के सरपंच राजेंद्र जांगड़ा ने विशेष तपस्या शुरू की है। सरपंच द्वारा 41 दिनों तक 9 धुनों के बीच बैठकर तपस्या की जाएगी। इस धार्मिक आयोजन को लेकर गांव के लोगों में भी श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना हुआ है। सरपंच राजेंद्र जांगड़ा ने बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति में तपस्या और साधना का विशेष महत्व माना गया है। हमारे पूर्वजों की आस्था रही है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई तपस्या से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा समाज और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि गांव में भाईचारा, खुशहाली और विकास बना रहे तथा गांव के लोग हर प्रकार की परेशानियों से दूर रहें, इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने यह तपस्या शुरू की है। उन्होंने बताया कि 9 धुनों के बीच बैठकर 41 दिनों तक नियम और अनुशासन के साथ साधना की जाएगी। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाएंगे। गांव के लोग भी समय-समय पर पहुंचकर पूजा में भाग ले रहे हैं।इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और लोगों में आपसी प्रेम व भाईचारे की भावना मजबूत होती है। वहीं, युवाओं ने भी इस पहल को गांव की एकता और धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए सराहनीय कदम बताया। मालवी गांव में चल रही इस तपस्या को लेकर आसपास के क्षेत्रों के लोगों में भी चर्चा बनी हुई है तथा श्रद्धालु लगातार पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 12, 2026, 15:08 IST
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