Waqf Bill: बड़े परिवर्तन और नए स्वरूप में पेश होगा वक्फ संशोधन विधेयक, राज्य सरकारों की बढ़ेंगी शक्तियां

लोकसभा में बुधवार को पेश होने वाला वक्फ संशोधन विधेयक प्रावधानों में कई अहम परिवर्तन के कारण नए स्वरूप में होगा। विधेयक के कानून बन जाने के बाद वक्फ संपत्ति विवाद सुलझाने में अब राज्य सरकारों को पहले से अधिक शक्तियां हासिल होंगी। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित कानून का असर पुरानी मस्जिदों, दरगाहों या मुसलमानों के धार्मिक संस्थानों पर नहीं पड़ेगा। हालांकि इस दौरान किए गए परिवर्तनों में वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। वह इसलिए कि बदलाव में बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम इसके इतर बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। दरअसल सरकार ने विधेयक के रास्ते को कील कांटे हटाने के लिए सहयोगी दलों की शर्तें मानने के अलावा अपने मूल विचार को शामिल करने में कोई समझौता नहीं किया है। यही कारण है कि सरकार ने जहां सहयोगी टीडीपी और जदयू को मनाने के लिए उनके सुझावों को विधेयक में शामिल किया है, वहीं अपने दलों के सांसदों के सुझावों को भी मूल विधेयक में जगह दी है। इसके कारण जेपीसी के विचार विमर्श और सुझावों के बाद तैयार किए गए विधेयकों में भी सरकार को कई अहम परिवर्तन करना पड़ा है। ये भी पढ़ें:वक्फ संपत्तियों के सदुपयोग का सवाल:नया संशोधन बिल अहम कदम, भ्रष्टाचार-अतिक्रमण के दीर्घकालिक मुद्दे हल जदयू और टीडीपी की मांग सरकार ने मानी सहयोगी जदयू-टीडीपी ने विधेयक के समर्थन के लिए कई शर्तें रखी थीं। जदयू की प्रमुख मांग थी कि सरकार अधिनियम के लागू होने से पहले मुसलमानों के धार्मिक पहचान से जुड़े स्थानों में छेड़छाड़ नहीं करेगी। मतलब अधिनियम लागू होने की पूर्व स्थिति बहाल रखेगी। टीडीपी ने वक्फ संपत्ति विवाद की जांच के लिए कलेक्टर से ऊपर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त वरिष्ठ अधिकारी को अंतिम अधिकार देने, वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण के लिए समय देने, जमीन से जुड़े विवाद के निपटारे के लिए अंतिम फैसले का हक राज्य सरकार को देने की मांग की थी। इसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। किए गए कई परिवर्तन˘ सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करने के साथ ही भाजपा ने सियासी संदेश देने के लिए अपनी ओर से भी विधेयक में कई परिवर्तन किए हैं। मसलन भाजपा युवा मोर्चा के प्रमुख तेजस्वी सूर्या के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया है कि पांच वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा। दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन का स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 02, 2025, 06:27 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »

Read More:
India news National



Waqf Bill: बड़े परिवर्तन और नए स्वरूप में पेश होगा वक्फ संशोधन विधेयक, राज्य सरकारों की बढ़ेंगी शक्तियां #IndiaNews #National #SubahSamachar