होर्मुज से जॉर्डन तक बढ़ा युद्ध का खतरा: ईरान ने अमेरिकी ठिकाने पर दागीं मिसाइलें, पश्चिम एशिया में हाई अलर्ट

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने जॉर्डन में उस एयरबेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं, जहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसने पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। वहीं अमेरिका ने भी ईरान पर बड़े एयरस्ट्राइक किए हैं। लगातार हो रहे हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में डर और अनिश्चितता बढ़ा दी है। बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में सायरन बजाए गए और एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। आखिर अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के मुताबिक अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और रडार साइट्स पर हमला किया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि होर्मुज के पास अमेरिकी एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर एक ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू की। अमेरिका का आरोप है कि ईरान लगातार अमेरिकी सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रहा है। ये भी पढ़ें-West Asia Crisis:पश्चिम एशिया में फिर भड़का तनाव, ईरान का दावा- बहरीन में अमेरिकी बेस पर किया ड्रोन हमला ईरान ने जॉर्डन और खाड़ी देशों को क्यों निशाना बनाया अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन की ओर जवाबी मिसाइल हमले किए। जॉर्डन ने कहा कि ईरान की पांच मिसाइलों को मार गिराया गया। ईरान का दावा है कि ये मिसाइलें मुवाफ्फाक सलती एयरबेस की ओर दागी गई थीं, जहां अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात हैं। बहरीन और कुवैत में भी खतरे के सायरन बजाए गए और एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी हमले का जवाब जरूर देगा। होर्मुज और तेल बाजार पर इसका क्या असर पड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल है। यहां बढ़ते तनाव का असर सीधे तेल सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद दुनियाभर में ऊर्जा कीमतें बढ़ी हैं। कई देशों में खाद्य पदार्थ और जरूरी सामान भी महंगे हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर संघर्ष और बढ़ा, तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। क्या इस्राइल-ईरान संघर्षविराम भी टूटने की कगार पर है ईरान और इस्राइल के बीच पहले से ही तनाव जारी है। हाल ही में लागू संघर्षविराम के बाद दोनों देशों ने फिर एक-दूसरे पर हमले किए। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि इस्राइली हमलों में उसके एयर डिफेंस यूनिट के दो सदस्य मारे गए। वहीं लेबनान में हिज्बुल्लाह और इस्राइल के बीच संघर्ष भी जारी है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ समझौते की कोशिशें अभी भी जारी हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर टकराव बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को खत्म करे, जबकि ईरान पहले प्रतिबंध हटाने और जमे हुए फंड जारी करने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान समेत कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार सैन्य कार्रवाई से शांति वार्ता कमजोर पड़ती दिख रही है। फिलहाल पूरा पश्चिम एशिया युद्ध जैसे हालात के बीच हाई अलर्ट पर है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 10, 2026, 10:15 IST
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