विश्व रेडियो दिवस: आकाशवाणी और विविध भारत के बाद एफएम रेडियो लाया क्रांति, आज भी करोड़ों दिलों पर करता है राज

मन को बहलाने और संगीत के लिए किसी समय रेडियो ही मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करता था। हिंदी फिल्मों के गीतों का चलन तब अधिक हुआ, जब रेडियो पर इनका प्रसारण होना आरंभ हुआ। रेडियो की लोकप्रियता में वृद्धि होती गई। बिनाका गीत माला, जो रेडियो सिलोन श्रीलंका से प्रसारित होती थी, के दीवानों की संख्या सर्वाधिक थी। समय के साथ संसाधन बदलते गए और उनमें परिवर्तन आया। वर्तमान में एफएम रेडियो का प्रचलन आरंभ हुआ, जिसने रेडियो के संगीत और उसके तौर तरीके को ही बदल कर रख दिया। एक तरह से एफएम रेडियो ने नई क्रांति ला दी है। मार्कोनी ने किया रेडियो का अविष्कार रेडियो का आविष्कार 1895 में इटली के वैज्ञानिक गूगलिएल्मो मार्कोनी ने किया था। 1896 में रेडियो का पेटेंट प्राप्त हुआ रेडियो के अविष्कार के लिए 1909 में मार्कोनी को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। कब से मनाया जाता है रेडियो दिवस विश्व रेडियो दिवस एक अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है। इसका प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा ने 2011 में पारित किया था। रेडियो दिवस मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य रेडियो को सूचना, मनोरंजन और शिक्षा के रूप में जन-जन तक पहुंचाना था। ये भी पढ़ें-इस बार हाईवे पर रहेगा विशेष डायवर्जन, छह जिलों के पुलिस बल सहित 2000 गार्ड्स रहेंगे तैनात

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 12, 2026, 22:40 IST
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