रायबरेली हादसे में तीन की मौत: घर के इकलौते चिराग थे विपिन, गम में बदली खुशियां, बार-बार बेहोश हो रही मां

रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली की ओर निकले तीन लोगों की मौत से खुशियां मातम में बदल गई। जौनपुर जिले के कुंवरपुर पवारा गांव के रहने वाले विपिन, उनके पिता के इकलौते सहारे थे। करीब दस साल पहले दिल्ली गए विपिन ने संघर्ष कर ट्रांसपोर्ट का काम शुरू किया और पिकअप वाहन खरीदा। पिता प्रेमचंद और मां साधना के लिए वह घर की सारी जिम्मेदारियां उठाते थे। विपिन अपने चालक रोहित के साथ बनारस माल उतारने के बाद सोमवार को घर आए थे। घर से राशन लेने के बाद शाम करीब आठ बजे दिल्ली के लिए रवाना हुए। उनके साथ उनके चाचा अखिलेश सरोज भी थे, जो दिल्ली में ठेला लगाते थे और तीन महीने से गांव में थे। सीजन शुरू होने पर वे भी कमाने के लिए लौट रहे थे। यह उनका आखिरी सफर साबित हुआ। जैसे ही इस हादसे की खबर गांव पहुंची घरों में रोना पिटना मच गया। मां साधना बार-बार बेहोश हो रही हैं। वहीं पिता प्रेमचंद की आंखें सूनी हैं। ये भी पढ़ें - ट्रेलर-पिकअप में भिड़ंत: चाचा-भतीजे समेत तीन की मौत, जोरदार टक्कर से पिकअप के परखच्चे उड़े ये भी पढ़ें - कांग्रेस का 'हल्ला बोल', पुलिस से भिड़े कांग्रेसी, बैरिकेडिंग पर चढ़े; पुलिस सबको ईडो गार्डन छोड़ रही दिल्ली में परिवार के साथ रह रही विपिन की पत्नी सोनी घटना की सूचना मिलते ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं, जहां पति का शव देखकर वह बेसुध होकर गिर पड़ीं। उनकी सिसकियां थम नहीं रहीं। विपिन की बेटियां शगुन, दृश्यम और छोटा बेटा रूद्र अभी इस बात को समझ नहीं पा रहे कि उनके पापा अब कभी नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर चाचा अखिलेश के बेटे आकाश, विकास और बेटी मुस्कान पिता के शव से लिपटकर बिलख पड़े। इस हादसे ने पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 17, 2026, 19:41 IST
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