Guna: सात साल की प्रतीक्षा हुई पूरी, 1008 कलशों से गूंजा गुना; बाहुबली के महामस्तकाभिषेक का बना इतिहास
गुना जिले में हाईवे किनारे स्थित दिगंबर जैन सर्वोदय ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में बुधवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सात साल से स्थापित भगवान बाहुबली की 31 फीट ऊंची प्रतिमा का पहला महामस्तकाभिषेक संपन्न हुआ। जगत पूज्य मुनि सुधासागर महाराज ससंघ के सानिध्य में हुए इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। सूर्यमंत्र की गूंज और जयकारों के बीच भगवान बाहुबली का जल, दूध, केसर, चंदन और औषधियों से अभिषेक किया गया। 2015 में लिया गया संकल्प, 2026 में हुआ ऐतिहासिक आयोजन इस भव्य प्रतिमा की कहानी वर्ष 2015 से शुरू होती है, जब मुनि सुधासागर महाराज का चातुर्मास गुना में हुआ था। उसी दौरान उन्होंने हाईवे किनारे एक विशाल बाहुबली प्रतिमा स्थापित करने की भावना व्यक्त की थी। इसी संकल्प से सर्वोदय ज्ञानतीर्थ परियोजना की शुरुआत हुई। वर्ष 2019 में टोल नाके के पास 40 फीट ऊंचे अधिष्ठान पर 31 फीट ऊंची भगवान बाहुबली की प्रतिमा स्थापित की गई। पांच फीट ऊंचे कमलासन पर खड्गासन मुद्रा में विराजित यह प्रतिमा जमीन से कुल 76 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी भव्यता ऐसी है कि लगभग 12 किलोमीटर दूर से भी इसके दर्शन किए जा सकते हैं। उत्तर भारत की पहली और मध्यप्रदेश की सबसे ऊंची एकल शिला बाहुबली प्रतिमा ज्ञानतीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष अरविंद जैन ने बताया कि यह उत्तर भारत की पहली इतनी विशाल भगवान बाहुबली प्रतिमा है। मध्यप्रदेश में एक ही पत्थर से निर्मित यह सबसे ऊंची जैन प्रतिमा मानी जाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़वानी जिले के बावनगजा में 84 फीट ऊंची प्रतिमा मौजूद है, लेकिन वह पहाड़ को तराशकर बनाई गई है। जबकि गुना की प्रतिमा एकल शिला से निर्मित होने के कारण विशेष महत्व रखती है। देश में कर्नाटक के श्रवणबेलगोला स्थित 57 फीट ऊंची बाहुबली प्रतिमा के बाद इसका प्रमुख स्थान माना जा रहा है। 1008 कलशों से हुआ महामस्तकाभिषेक मंगलवार को मुनि सुधासागर महाराज ने सूर्यमंत्र देकर प्रतिमा की प्रतिष्ठा संपन्न कराई थी। इसके बाद बुधवार को महामस्तकाभिषेक का आयोजन किया गया। इस दौरान 1008 कलशों से जल, दूध, केसर, चंदन और विभिन्न औषधियों द्वारा भगवान बाहुबली का अभिषेक किया गया। क्रेन की सहायता से अभिषेक सामग्री प्रतिमा के शीर्ष तक पहुंचाई गई। मुनि सुधासागर महाराज ने कहा कि यह प्रतिमा अलौकिक ऊर्जा का केंद्र है और इसकी प्रतिष्ठा के साथ ही यहां चमत्कारों की श्रृंखला शुरू होगी। अभिषेक के दौरान पूरे परिसर में "जय बाहुबली" के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए। ज्ञानतीर्थ में जिनालय, स्कूल और गौशाला भी संचालित सर्वोदय ज्ञानतीर्थ केवल प्रतिमा तक सीमित नहीं है। यहां भव्य जिनालय, स्कूल और गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है। प्रतिमा के नीचे तल पर प्रद्युम्न कुमार परिवार द्वारा स्थापित भगवान आदिनाथ की सात फीट ऊंची प्रतिमा भी विराजमान है। इन दिनों यहां पंचमुखी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन भी चल रहा है, जिससे पूरे शहर में धार्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए भोजनशाला, पार्किंग और चिकित्सा सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई। तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री अखलेश जैन ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर प्रथम जलाभिषेक का पुण्य लाभ लेने की अपील की। वहीं स्थानीय प्रशासन ने हाईवे पर यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए। धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान बना गुना सात वर्षों की प्रतीक्षा के बाद संपन्न हुआ यह महामस्तकाभिषेक गुना को धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान देने वाला माना जा रहा है। मान्यता है कि भगवान बाहुबली के दर्शन से व्यक्ति का अहंकार समाप्त होता है और आत्मबल जागृत होता है। इस ऐतिहासिक आयोजन ने गुना को देशभर के जैन श्रद्धालुओं और धार्मिक पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 24, 2026, 11:11 IST
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