Gorakhpur News: फार्म हाउस पहुंच बछिया के पैर छुए...छत पर पहुंचते ही लगी गोली
- सुबह सिविल लाइंस स्थित आवास से कार लेकर अकेले निकले थे अंबरीश गोरखपुर। कुसम्ही स्थित फार्म हाउस पर गोरखपुर क्लब के संचालक अंबरीश श्रीवास्तव की संदिग्ध हालात में हुई मौत का घटनाक्रम कई सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार की सुबह वह पार्क रोड स्थित अपने आवास से अकेले कार लेकर फार्म हाउस पहुंचे थे। वहां उन्होंने पहले गायों को देखा। कर्मचारियों से एक गाय के बछिया के जन्म देने की बात पता चली तो बछिया के पैर छुए और फिर फोन पर बात करते हुए छत पर चले गए। कुछ देर बाद गोली चलने की आवाज से हड़कंप मच गया।फार्म हाउस पर मौजूद कर्मचारियों के मुताबिक, वहां पहुंचने के बाद अंबरीश ने सबसे पहले पूछा कि, किस गाय ने बछिया जनी है। कर्मचारियों के बताने के बाद वह सीधे उसी गाय के पास पहुंचे और बछिया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह फार्म हाउस का मुआयना करते हुए मोबाइल पर किसी से बातचीत करते रहे और धीरे-धीरे मकान की तीसरी मंजिल की ओर बढ़ गए। कर्मचारियों ने बताया कि कुछ ही देर बाद ऊपर से गोली चलने की आवाज आई। पहले तो किसी को कुछ समझ नहीं आया लेकिन जब काफी देर तक वह नीचे नहीं लौटे तो एक कर्मचारी ऊपर गया। वहां का दृश्य देख वह सन्न रह गया। अंबरीश खून से लथपथ पड़े थे और पास ही उनकी लाइसेंसी पिस्टल पड़ी थी। आनन-फानन में अन्य लोगों को बुलाया गया और परिजनों को सूचना दी गई।छोटे भाई नितिन श्रीवास्तव ने पुलिस को दी तहरीर में बताया है कि, सुबह करीब 9:35 बजे ड्राइवर उमेश तिवारी का फोन आया था। उमेश ने बताया कि फार्म हाउस के स्टाफ ने सूचना दी है कि अंबरीश छत पर पिस्टल साफ कर रहे थे, तभी अचानक गोली चलने की आवाज आई। ऊपर जाकर देखा गया तो उनके मुंह से खून निकल रहा था। आशंका जताई गई कि पिस्टल साफ करते समय अचानक गोली चल गई, जो सीधे उनके मुंह में जा लगी।दो भाइयों में बड़े थे अंबरीशअतुल श्रीवास्तव के दो बेटों में अंबरीश बड़े थे और परिवार की अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। पिता की तबीयत इन दिनों खराब चल रही है। उन्होंने संपत्ति का बंटवारा पहले ही कर दिया था, जिसमें अंबरीश को गोरखपुर क्लब के संचालन की जिम्मेदारी मिली थी, जबकि छोटे भाई को निपाल लॉज सौंपा गया था। वह अपने पीछे पिता, पत्नी दीपाली, दो बच्चों ईशान एवं वीर और भाई का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा परिवारअंबरीश का परिवार शहर में सामाजिक रूप से काफी सक्रिय रहा है। उनके पिता अतुल श्रीवास्तव चित्रगुप्त मंदिर सभा के अध्यक्ष रह चुके हैं और समाज में सम्मानित पहचान रखते हैं। पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अम्बरीश भी सामाजिक गतिविधियों में जुड़े रहे। वह वर्तमान में चित्रगुप्त मंदिर सभा में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे। प्रदेश भर में फैला था कारोबारअंबरीश का कारोबार शहर से प्रदेश के कई जिलों में फैला हुआ था। टेंट व्यवसाय के साथ ही वह ठेकेदारी में भी सक्रिय थे और पीडब्ल्यूडी में पंजीकृत ठेकेदार के रूप में काम करते थे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने लखनऊ में अपना सेंटर स्थापित किया था जबकि लखीमपुर खीरी में हॉट मिक्स प्लांट संचालित कर रहे थे। मुरादाबाद और रामपुर समेत अन्य जिलों में भी उनके प्रोजेक्ट चल रहे थे, जिससे उनका व्यवसाय लगातार विस्तार पर था। पिता की मौत की खबर सुन बिलख पड़े बच्चेअंबरीश श्रीवास्तव की मौत की सूचना मिलते ही उनके दोनों बच्चों को पूर्वांह्न करीब 11 बजे स्कूल से बुलाया गया। जैसे ही उन्हें पिता के निधन की जानकारी मिली, दोनों बच्चे कार में ही अपना बैग छोड़ रोते-बिलखते घर की ओर दौड़ पड़े। उस समय परिवार के अधिकतर सदस्य कुसम्ही स्थित फार्म हाउस गए हुए थे। घर पर मौजूद परिजनों और परिचितों ने किसी तरह बच्चों को संभाला, लेकिन उनका रो-रोकर बुरा हाल रहा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 25, 2026, 06:04 IST
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