India-Russia: अमेरिकी दबाव के बीच पुतिन की भारत यात्रा पर दुनिया की नजर, तेल को लेकर नए समझौते की तैयारी

अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच पुतिन की भारत यात्रा पर दुनियाभर की निगाहें टिकी हैं। यह दौरा भारत और रूस के नेतृत्व को द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा करने, विशेष रणनीतिक साझेदार को मजबूत करने और परस्पर हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करेगा। रूस की कोशिश भारत को पहले की तेल निर्यात करने की है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पुतिन के तेल आयात पर अतिरिक्त छूट के प्रस्ताव पर भारत का रुख क्या रहता है। दरअसल अमेरिकी दबाव में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। इस महीने भारत ने रूस से प्रतिदिन 9.48 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो बीते महीने के करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन की तुलना में लगभग आधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी की ओर से लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के बावजूद भारत पर बड़ा दबाव नहीं पड़ा है। सितंबर में जहां भारत से अमेरिका को निर्यात में 12 फीसदी की कमी आई थी, वहीं अक्तूबर महीने में यह घटकर 8.6 फीसदी रह गई। ऊर्जा क्षेत्र में कई समझौते संभव तेल आयात के इतर दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा, गैस आपूर्ति के क्षेत्र में समझौते की संभावना है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस दौरान दोनों देशों का आने वाले 25 वर्षो के लिए संयुक्त दृष्टिपत्र भी जारी हो सकता है। दृष्टिपत्र में अंतरिक्ष, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की दिशा तय हो सकती है। निर्यात के लिए नए क्षेत्र की तलाश में भारत पीएम मोदी-राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली बातचीत में भारत का प्रयास रूस में निर्यात के लिए नया अवसर तलाशने पर होगा। गौरतलब है कि वर्तमान में भारत का रूस से आयात बहुत ज्यादा है, हालांकि इसकी तुलना में निर्यात आयात के महज दस फीसदी ही है। भारत इस स्थिति में बदलाव लाने के लिए रूस में निर्यात के लिए नए क्षेत्रों का चयन कर अपने सामानों की आपूर्ति की संभावना तलाशेगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 29, 2025, 03:40 IST
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