Tourism: अंडमान को पर्यटन का हब बनाने की पहल, केंद्र को प्रशासन का नहीं मिल रहा पूरा साथ; जानिए क्या है मामला
केंद्र सरकार अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात कर चुके हैं। द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर के हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रूप में विकसित करने के अलावा विभिन्न द्वीपों के बीच आवागमन सुनिश्चित करने, इंटरनेट सेवा मजबूत करने, सड़क और बिजली की स्थिति सुधारने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। स्थानीय आदिवासी समुदाय को भी मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। केंद्र के प्रयासों के कारण पर्यटकों की संख्या में तेज वृद्धि भी हुई है। मगर इन सभी प्रयासों के बीच स्थानीय प्रशासन का रवैया विकास की गति को धीमा करता दिख रहा है। एक छोटे उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। दरअसल अंडमान-निकोबार में भवन निर्माण के लिए जमीन की कमी है और किसी को ऐसा निर्माण करवाना हो तो लैंड यूज को बदलवाना पड़ता है। मगर कमाल की बात है कि यहां के प्रशासन ने पिछले छह वर्षों में सिर्फ एक भूमि का लैंड यूज बदलने की मंजूरी दी है और वह भी हाईकोर्ट के आदेश पर। करीब 261 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की इस भूमि के मालिक बिधान चंद्र पोद्दार ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से अपनी जमीन का लैंड यूज बदलवाने के लिए सरकारी अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। ये भी पढ़ें:IRCTC:रामलला के दर्शन करा रहा आईआरसीटीसी, जानिए कितना है टूर पैकेज का किराया सरकारी रिकार्ड में यह जमीन जंगल के रूप में दर्ज थी जबकि इसके आसपास की सारी जमीनों पर मकान बन चुके थे। इसके बावजूद संबंधित एसडीओ उनकी भूमि का लैंड यूज नहीं बदल रहे थे। जाहिर है कि प्रशासन का ये रवैया एक ऐसे क्षेत्र के विकास की राह में बड़ा रोड़ा है जो पहले से ही देश की मुख्य भूमि से हजारों मील दूर है और जहां पहुंचने के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ता है। किसी भी क्षेत्र का प्रशासन लोगों की सुविधा बढ़ाने की कोशिश करता है मगर लगता है कि अंडमान का प्रशासन इसके उलट चल रहा है। एलजी का आदेश भी नहीं माना पोद्दार ने एसडीओ के फैसले को केंद्र शासित प्रदेश के उप राज्यपाल के पास चुनौती दी। उपराज्यपाल ने जरूरी शुल्क लेकर लैंड यूज बदलने का आदेश दे दिया लेकिन कमाल की बात है कि संबंधित एसडीओ ने इस फैसले की गलत व्याख्या की और लैंड यूज बदलने से मना कर दिया। तब पोद्दार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। ये भी पढ़ें:IDA Meeting:अंडमान-लक्षद्वीप का बुनियादी ढांचा विकास हमारी प्राथमिकता, शाह बोले- संबंधित मंत्रालय सहयोग करें हाईकोर्ट के आदेश पर लैंड यूज बदला मगर 9 शर्तें लगाईं आखिरकार हाईकोर्ट ने एसडीओ को फटकार लगाते हुए जमीन का इस्तेमाल बदलने का आदेश दिया। इसके बाद एसडीओ ने जरूरी शुल्क लेकर लैंड यूज बदलने का आदेश दिया। हालांकि तब भी इसके लिए करीब 9 शर्तें लगाईं गईं। इनमें एक शर्त यह थी कि तीन साल के अंदर भूमि मालिक को जमा किए गए नक्शे के अनुसार पूरे भवन का निर्माण करना होगा अन्यथा उनपर जुर्माना लगाया जाएगा। संबंधित वीडियो
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 24, 2025, 05:38 IST
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