Anthropic विवाद ने लिया नया रूप: भारतीय स्टार्टअप की कानूनी कार्रवाई, जानें अमेरिकी कंपनी क्यों है निशाने पर
बेलगावी की सॉफ्टवेयर कंपनी का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चर्चित अमेरिकी एआई कंपनी के भारत में ऑफिस खोलने के एलान के बाद भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। याचिकाकर्ता मोहम्मद अय्याज मुल्ला के अनुसार, निवेशकों और ग्राहकों को अक्सर लगता है कि दोनों कंपनियां आपस में जुड़ी हुई हैं। इससे उनकी कंपनी की स्वतंत्र पहचान कमजोर हो रही है और बिजनेस पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। यह केस बेलगावी की जिला एवं वाणिज्यिक अदालत में दर्ज किया गया है। कोर्ट रिकॉर्ड में मामला एनथ्रोपिक सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड, बेलगावी बनाम एंथ्रोपिक पीबीसी, सैन फ्रांसिस्को का नाम से दर्ज किया है। कोर्ट में अब तक क्या हुआ मामले की सुनवाई 16 फरवरी को होनी थी, लेकिन अमेरिकी कंपनी के प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुए। इसके बाद प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड कमर्शियल कोर्ट ने दोबारा समन जारी किया है और कंपनी के बेंगलुरु के अधिकारियों को 9 मार्च को पेश होने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में ही साफ होगा कि अदालत इस नाम विवाद को किस तरह देखती है। क्यों अहम है यह विवाद यह मामला सिर्फ दो कंपनियों के बीच ट्रेड का विवाद नहीं है। यह छोटे भारतीय स्टार्टअप्स की ब्रांड सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। एक्पर्ट्स का मानना है कि आज जब वैश्विक एआई कंपनियां भारत में तेजी से विस्तार कर रही हैं, तब लोकल स्टार्टअप्स के लिए अपनी पहचान बनाए रखना चुनौती बन सकता है। ब्रांड का नाम किसी भी स्टार्टअप की सबसे बड़ी अमूर्त संपत्ति (intangible asset) होता है। अगर नाम को लेकर भ्रम पैदा होता है, तो निवेश, साझेदारी और ग्राहक विश्वास तीनों प्रभावित हो सकते हैं। हालाकिं अब सबकी नजर अदालत के फैसले पर है। क्या भारतीय स्टार्टअप को अपने नाम की कानूनी सुरक्षा मिलेगी या वैश्विक ब्रांड की मौजूदगी इस मामले को नया मोड़ देगी यह केस भविष्य में आने वाले ऐसे विवादों के लिए एक मिसाल भी बन सकता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 19, 2026, 07:11 IST
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