बांग्लादेश में BNP को बड़ा जनादेश: डार्क प्रिंस तारिक रहमान बनेंगे अगले पीएम? चुनाव से मतदान तक 10 अहम बातें

करीब 18 महीनों के अंतराल के बाद बांग्लादेश में चुनावी लोकतंत्र फिर से पटरी पर लौटता दिख रहा है। अंतरिम शासन के बाद13वें संसदीय चुनाव में कल यानी 12 फरवरी कोजनता को नई सरकार चुनने का मौका मिला और अब जनता ने इस चुनाव में अपना रुख पूरी तरह साफ करते हुए अपना निर्णय दे दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसारइस चुनाव मेंबांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। पार्टी ने अब तक 151 सीटों पर जीत हासिल कर ली है, जो बहुमत के आंकड़े 150 से अधिक है। मतदान शाम 4 बजे समाप्त हुआ था। शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे तक आए रुझानों के मुताबिक, बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 151 सीटें मिलीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 43 सीटें मिली हैं। अन्य टीवी चैनलों ने भी बताया कि बीएनपी 120 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है। क्या है सीटों का समीकरण, समझिए बांग्लादेश की संसद, जिसे जातीय संसद कहा जाता है, में कुल 300 सीटें हैं। इनमें से 299 सीटों पर मतदान हुआ।शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया। बहुमत के लिए 150 सीटें जरूरी होती हैं। इसके अलावा 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों का बंटवारा 300 सामान्य सीटों पर पार्टियों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है। बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी में चुनाव बता दें कि यह चुनाव खास इसलिए भी था क्योंकि इसमें दो पूर्व प्रधानमंत्री शामिल नहीं थे। शेख हसीनाजो आवामी लीगकी प्रमुख हैं, अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से हटा दी गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। उनकी पार्टी का पंजीकरण निलंबित होने के कारण वह चुनाव नहीं लड़ सकी। दूसरी ओर खालिदा जियाजो बीएनपी की पूर्व प्रमुख थीं, का पिछले साल दिसंबर में निधन हो गया था। उनके बेटे तारिक रहमान करीब 17 साल के निर्वासन के बाद देश लौटे और अब प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बांग्लादेश चुनाव की दस अहम बातें बांग्लादेशके आम चुनाव में बीएनपी ने 151 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त बना ली है। बहुमत के लिए 150 सीटों की जरूरत होती है। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को अब तक 43 सीटें मिली हैं। देश की संसद जातिए संसद की 299 सीटों पर वोटिंग हुई। एक सीट (शेरपुर-3) पर उम्मीदवार की मौत के कारण मतदान रद्द हुआ। इनके अलावा 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जो पार्टियों की जीत के अनुपात से भरी जाएंगी। पहली बार चुनाव में शेख हसीना औरखालिदा जियामैदान में नहीं थीं। तारिक रहमान लगभग 17 साल बाद देश लौटे और प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार बनकर उभरे। जमात के साथ नेशनल सिटिजन पार्टी जैसे छात्र संगठनों ने भी गठबंधन किया, जो छात्र आंदोलन से उभरे थे। बीएनपी के नेता गायेश्वर चंद्र रॉय ढाका-3 सीट से जीतकर 1971 के बाद ढाका से पहले हिंदू सांसद बन सकते हैं। चुनाव के साथ जुलाई नेशनल चार्टर पर भी वोटिंग हुई। इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा और केयरटेकर सरकार बहाल करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। यह प्रस्ताव अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में तैयार हुआ। भारत इस चुनाव पर नजर रखे हुए है, क्योंकि इसका असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ सकता है। बांग्लादेश पर भारत की पैनी नजर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में बीते कुछ दिनों उतार-चढ़ाव देखने को मिली है।अंतरिम शासन के दौरान कई बातों पर दोनों देशों के रुख अलग थलग दिखे है। ऐसे मेंभारत इस चुनाव पर करीबी नजर रखे हुए है।भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवालने इस मामले में कहा किपहले चुनाव के नतीजों का इंतजार करना चाहिए, उसके बाद ही आगे की स्थिति पर टिप्पणी की जाएगी। कुल मिलाकर, शुरुआती नतीजों से साफ है कि बीएनपी बहुमत की ओर है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 13, 2026, 05:22 IST
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