चावड़ी बाजार हादसा: मलबे के नीचे और लोगों के फंसे होने के आशंका, पुलिस के साथ तलाशी अभियान में जुटीं कई टीमें
पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार में बृहस्पतिवार सुबह करीब 9:50 बजे निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। मृतकों की पहचान रेलवे कॉलोनी, मंडावली निवासी किशोरी (40) और संजीत (45) के रूप में हुई है। अधिकारियों ने बताया कि मलबे में अभी और लोगों के फंसे होने की आशंका है। दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा और एमसीडी के संयुक्त बचाव अभियान के तहत लोगों की खोज जारी है। #WATCH | Delhi: Latest visuals from the spot where a joint rescue operations involving Delhi Police, NDRF, Delhi Fire Services and MCD are underway after an under-construction, three-storey building collapsed at Gali Sheesh Mahal, Chawri Bazar, at around 09:48 AM today. Two people lost their lives in the incident.mdash; ANI (@ANI) November 5, 2026 दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर हालात जाने और घटना की जांच के आदेश दिए हैं। सीएम ने कहा कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।साथ ही उन्होंने अधिकारियों को ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। दूसरी ओर, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने निर्माणाधीन इमारत ढहने के मामले में बृहस्पतिवार को दो अधिकारियों, संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) और सहायक अभियंता (एई) को निलंबित कर दिया। उन्होंने आम जनता से भी निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की। चावड़ी मेट्रो स्टेशन के सामने हुआ हादसा दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह करीब 9:50 बजे गली शाहतारा स्थित शीश महल में इमारत ढहने की सूचना मिली। यह स्थान चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के सामने है। अग्निशमन सेवा के एक अधिकारी ने बताया कि डीएफएस की टीम ने मलबे से दो लोगों को मृत अवस्था में बाहर निकाला। टीम के पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने पांच अन्य लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचा दिया था। वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में दमकल की कई गाड़ियां बचाव अभियान चला रही हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी रहने की संभावना है। इमारत ढहने की वजह एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस भूखंड पर तीन मंजिला इमारत ढही (चौथी मंजिल का काम चल रहा था), उसका क्षेत्रफल 50 वर्ग मीटर था। इस इमारत के लिए भवन निर्माण योजना स्वीकृत नहीं कराई गई थी और निर्माण को लेकर नगर निगम को कोई शिकायत भी नहीं मिली थी। अधिकारी ने बताया कि इमारत का निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन करीब 15 दिन पहले इसे रोक दिया गया था। हादसे के समय मजदूर छत के नीचे लगे सहारों को हटाने का काम कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप नहीं थी और ठीक से जम भी नहीं पाई थी। माना जा रहा है कि यह भी इमारत ढहने की एक वजह हो सकती है। आसपास के लोगों को बाहर निकाला मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि हौज काजी इलाके में स्थित यह इमारत तीसरी मंजिल तक बनी हुई थी और चौथी मंजिल की छत का लिंटर डालने के दौरान ढह गई। उन्होंने बताया कि आसपास की इमारतों में रहने वाले लोगों को बाहर निकाल लिया गया है, क्योंकि इससे सटी एक इमारत की स्थिति भी खतरनाक थी। सिंह ने कहा कि पुलिस ने ठेकेदार की पहचान कर ली है और उसे गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य अनधिकृत रूप से किया जा रहा था। डीसीपी के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान वहां करीब 10 से 15 मजदूर मौजूद थे। मामला दर्ज किया गया डीसीपी सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह करीब 9:50 बजे चावड़ी बाजार की गली शीश महल में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढह गई। दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा और एमसीडी की टीमें संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रही हैं। उन्होंने बताया कि मंडावली निवासी सहदेव चौधरी (25), पुत्र दारा चौधरी और रेलवे कॉलोनी, मंडावली निवासी फिरोज (37), पुत्र तौहीद को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। वहीं, कई अन्य लोग मामूली रूप से घायल हुए थे, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि इमारत के मालिकों और ठेकेदारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली में इस साल इमारत ढहने से 21 लोगों की मौत : दिल्ली में इस साल इमारत ढहने का यह छठा बड़ा मामला है। इससे पहले हुए पांच हादसों में 21 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सत्य निकेतन और सीमापुरी के हादसे भी शामिल हैं। जान गंवाने वालों में कई छात्र भी थे। 30 मई : सैदुल्लाजाब इलाके में वेस्टर्न मार्ग पर चार मंजिला व्यावसायिक इमारत ढह गई। इसमें कोचिंग सेंटर, कैफे और कार्यालय संचालित हो रहे थे। मलबा पास की कैंटीन पर भी गिरा, जहां छात्र मौजूद थे। हादसे में छह लोगों की मौत हुई और 13 लोग घायल हुए। 8 जुलाई: रोहिणी सेक्टर-16 में बारिश के दौरान दो निर्माणाधीन इमारतें ढह गईं। हादसे के बाद कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हुई। 21 अगस्त: करोल बाग के रेगरपुरा इलाके में प्यारे लाल रोड पर एक इमारत का हिस्सा गिर गया। यहां इमारत को तोड़ने का काम चल रहा था। हादसे में वहां काम कर रहे एक मजदूर की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। 6 सितंबर: सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढह गई। इस इमारत में लड़कों का पीजी संचालित हो रहा था। हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। बचाव दल ने मलबे से लोगों को बाहर निकाला। हादसे में सात लोगों की मौत हुई और पांच घायल हुए। 7 अक्टूबर: सीमापुरी इलाके में चार मंजिला इमारत का अगला हिस्सा ढह गया। हादसे में आसपास के लोग भी मलबे की चपेट में आ गए। बचाव दल ने 11 लोगों को बाहर निकाला। इस हादसे में चार लोगों की मौत हुई और आठ लोग घायल हुए।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 06, 2026, 02:53 IST
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