रणनीति: आस्था के मैदान में कांग्रेस वापस, शिव के सहारे भाजपा को जवाब! शिव बरात से तांडव तक राहुल का नया दांव
वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई अब चुनाव आयोग की दहलीज लांघकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दरवाजे तक पहुंच गई है। रामलीला मैदान में रविवार को हुई संयुक्त विपक्ष की दिल्ली चलो रैली में राहुल गांधी ने शिव की बरात और तांडव के रूपक के सहारे साफ कर दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तो सिर्फ चेहरा हैं, असली मुकाबला मोदी और शाह से है। इसके लिए उन्होंने एसआईआर गड़बड़ी, और वोट चोरी के संघर्ष के सहारे सियासी पिच तैयार कर ली है। मंच भले ही संयुक्त विपक्ष का था, पर सुर्खियां राहुल के भाषण ने बटोरीं जिसमें उन्होंने धर्म और राजनीति को खुलकर एक धागे में पिरोया। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई निजी नहीं, संविधान बचाने की है और यह ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं रहेगी। संदेश साफ था कि कांग्रेस भाजपा से आर-पार की लड़ाई के मूड में है, और जरूरत पड़ी तो अकेले भी। राहुल हुल ने विपक्ष के इस जमावड़े की तुलना शिव की बारात से की, जिसमें हर धर्म और हर जाति के लोग शामिल होते हैं। संयुक्त विपक्ष मोहब्बत की बरात राहुल ने कहा कि संयुक्त विपक्ष मोहब्बत की बरात है, जबकि भाजपा नफरत की बरात है। शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि जब अन्याय बढ़ता है तो शिव तांडव करते हैं। रामलीला मैदान में उमड़ी भीड़ को उन्होंने वोट चोरी के खिलाफ जनता का तांडव बताया। धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करने वाले राहुल का यह अंदाज बताता है कि वह आस्था का मैदान अब भाजपा के लिए खाली नहीं छोड़ना चाहते। रैली से तीन बड़ेसंकेत राजनीतिक जानकारों के मुताबिक शिव का जिक्र सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसके तीन अर्थ निकालने जा सकते हैं। पहला, आस्था के मैदान में कांग्रेस की वापसी। अब तक राम मंदिर और हिंदुत्व के मैदान पर भाजपा अकेले खेलती रही निशाने को लेकर स्पष्टता। अब तक राहुल का हमला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर केंद्रित था। रैली में उन्होंने बड़े संकेत इस मोर्चे का रुख मोदी-शाह की ओर मोड़ दिया और कहा कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। तीसरा, जन आंदोलन का संकेत। राहुल ने बारात और तांडव, दोनों रूपक सोच-समझकर चुने। बारात यानी ऐसी विपक्षी एकजुटता जिसमें सब शामिल हों, और तांडव यानी सत्ता के अहंकार पर प्रहार। इसे कांग्रेस के कल मिलते हैं, साथ चलते हैं नारे की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 03, 2026, 06:03 IST
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