Rajnath Singh: रक्षा मंत्री बोले- उत्तर भारत ने दक्षिण पर नहीं जमाया प्रभुत्व, देश का चरित्र मानवता की सेवा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, यह कहना भ्रामक है कि कई मुद्दों पर उत्तर भारत ने दक्षिण के राज्यों पर प्रभुत्व जमा लिया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की धरती स्वयं इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण ने कई अवसरों पर धर्म के मामलों में उत्तर को नई दिशा दी है। रक्षा मंत्री ने मंगलवार को तुमकुरु में सिद्धगंगा मठ में डॉ. श्रीश्रीश्री शिवकुमार स्वामी की 118वीं जयंती समारोह में उत्तर के सांस्कृतिक और धार्मिक परिदृश्य को आकार देने में दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया। रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की हाल ही में एक प्रमुख अखबार में लिखे गए संपादकीय के बाद आई है। सोनिया गांधी के लेख में उत्तर और दक्षिण के राज्यों के साथ केंद्र सरकार के व्यवहार का उल्लेख किया गया है। सिंह ने कहा कि काशी के आचार्य मंडन मिश्र और आदि शंकराचार्य के बीच हुआ शास्त्रार्थ भारतीय संस्कृति का सबसे प्रसिद्ध शास्त्रार्थ है। यह सर्वविदित तथ्य है कि उस शास्त्रार्थ में शंकराचार्य ने मंडन मिश्र को पराजित किया था, लेकिन उसके बाद मंडन का क्या हुआ, यह बहुत कम लोगों को पता है। आचार्य मंडन शंकराचार्य के शिष्य बन गए। वे कर्नाटक आए और श्रृंगेरी में आचार्य सुरेशाचार्य के रूप में शंकराचार्य बने। उन्होंने कहा, इसका मतलब है कि भारतीय परंपरा ज्ञान को लेकर बहुत उदार रही और सत्य को स्वीकार करने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं की। इसलिए मेरा मानना है कि आज गुलामी के कालखंड में मतभेद पैदा करने के लिए किए गए दुष्प्रचार से मुक्ति पाने की जरूरत है। ये भी पढ़ें:राज्यसभा:विमानों को पट्टे पर देने के लिए कानून जरूरी, किराये में होगी कमी; विवादों को सुलझाने वाला बिल पारित रक्षा मंत्री ने कहा, जैसे हर व्यक्ति या वस्तु में कोई न कोई विशेष गुण होता है, वैसे ही देश का भी अपना चरित्र और पहचान होती है। भारत का चरित्र हमेशा से आध्यात्मिकता और मानवता की सेवा का रहा है। हमें इस पहचान को सदैव बनाए रखना है। देश के संतों ने भारत की संस्कृति को जीवित रखा राजनाथ ने कहा, कई आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की। लेकिन इस देश के संतों ने अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। डॉ श्रीश्रीश्री शिवकुमार महास्वामी जी जैसे संतों के कारण ही यह संस्कृति जीवित है। उन्होंने कहा, स्वामी जी ने गुरु के रूप में अपने अनुयायियों को हर इंसान के अंदर ईश्वर को देखने का जो मूल्य दिया है, वह मानवता के कल्याण और अस्तित्व को बनाए रखने का आधार है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 02, 2025, 06:18 IST
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