सर्दियों के संकट पर सरकार सक्रिय: विशेषज्ञ बोले- वाहनों पर सख्ती ठीक, औद्योगिक प्रदूषण पर भी कसा जाए शिकंजा

दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने शीतकालीन वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस नए रोडमैप का मुख्य उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले जहरीले उत्सर्जन को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से राजधानी की हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, हालांकि औद्योगिक प्रदूषण और निर्माण गतिविधियों पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।सर्दियों के मौसम में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अक्सर गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण सड़कों पर बढ़ता वाहनों का दबाव और उनसे निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड व सल्फर डाइऑक्साइड जैसी प्रदूषक गैसें हैं। सरकार की नई व्यवस्था इन उत्सर्जनों को कम करने पर केंद्रित है। लास्ट माइल को मजबूत बनाना होगा पर्यावरणविद् बिजन मिश्रा ने कहा कि सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। उनके अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहनों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। साफ है कि वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी आने से वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करना है, तो लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना होगा। अन्यथा बाहरी क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। बेहतर सार्वजनिक परिवहन का विकास भी जरूरी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की फेलो प्रार्थना बोराह ने बताया कि दिल्ली में सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्म व अतिसूक्ष्म कणों के प्रदूषण का लगभग 19 से 24 प्रतिशत हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है, जिसमें निजी वाहनों का योगदान सबसे अधिक है। उनके अनुसार, निजी वाहनों पर निर्भरता कम कर प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई शहरों में ऐसे उपाय सफल रहे हैं। हालांकि, इसके लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन और मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास भी उतना ही जरूरी है। अवैध रूप से चल रहे उद्योग कानून के दायरे में लाए जाएं पर्यावरणविद् संजय मिश्रा का कहना है कि सरकार के प्रस्तावित कदम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अभी पर्याप्त नहीं हैं। सरकार की ओर से किए गए उपायों पर उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रदूषण को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए अधिक सख्त उपायों की जरूरत है। अवैध रूप से संचालित उद्योगों को कानून के दायरे में लाना और पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने निर्माण सामग्री के भंडारण स्थलों की नियमित निगरानी और नियंत्रण की भी मांग की, क्योंकि ये भी प्रदूषण के बड़े स्रोत हैं। पीयूसी नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी ऊर्जा बचाने और उत्सर्जन कम करने के प्रयास अहम हैं, क्योंकि इससे दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। पीयूसी नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है, ताकि केवल प्रदूषण मानकों पर खरे उतरने वाले वाहन ही सड़कों पर चल सकें। हालांकि, रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करके सड़कों पर चल रही अधिक प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की पहचान की जा सकती है। -विवेक चट्टोपाध्याय, प्रिंसिपल प्रोग्राम मैनेजर, वायु प्रदूषण नियंत्रण इकाई, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 20, 2026, 03:45 IST
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