MP Weather Update: मानसून की राह देख रहा मध्य प्रदेश, 45 जिले सूखे, आज 38 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री अब तक नहीं हो सकी है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियों के चलते मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 38 जिलों में आंधी, गरज-चमक और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं सीहोर और आगर-मालवा में तेज हवाओं को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना के आसपास रुका हुआ है। यदि इसकी गति अगले दो-तीन दिनों में बढ़ती है तो 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। सामान्य तौर पर प्रदेश में मानसून 15 जून तक पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने से करीब 8 से 10 दिन की देरी हो रही है। इन जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, बुरहानपुर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। इन जिलों में तेज धूप और उमस रीवा, सतना, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार और खरगोन में तेज धूप और उमस बनी रहने की संभावना है। बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता मानसून की देरी का असर पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहा है। जून में अब तक सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश के 55 में से 45 जिले सामान्य वर्षा से पीछे चल रहे हैं। सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर पड़ा है, जहां जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में औसतन 65 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में भी सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। यह भी पढ़ें-बरकतउल्ला में बड़ा बदलाव, कुलगुरु प्रो. एसके जैन का इस्तीफा मंजूर, प्रो. विवेक शर्मा को मिली कमान किसानों की बढ़ी परेशानी खरीफ सीजन की बोवनी मानसून पर निर्भर है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान सोयाबीन, मूंग, उड़द और तुअर जैसी फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षित बोवनी के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बन सके। प्रदेश के कई हिस्सों में किसानों ने समय पर मानसून आने की उम्मीद में पहले ही बोवनी कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कई ग्रामीण इलाकों में किसान बारिश की कामना को लेकर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान भी कर रहे हैं। तापमान में आंशिक राहत शुक्रवार को राजगढ़, रीवा, सतना, दमोह और मैहर समेत कई जिलों में बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि खजुराहो और दतिया जैसे क्षेत्रों में पारा अब भी 41 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। बड़े शहरों में भोपाल 37.3, इंदौर 35.1, उज्जैन 36, जबलपुर 38.8 और ग्वालियर 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह भी पढ़ें-स्थानांतरण नीति से शिक्षक चिंतित: बोले-95% शिक्षक नहीं कर पाएंगे आवेदन, ई-अटेंडेंस और जनगणना ड्यूटी बनी मुसीबत पिछले वर्षों में मानसून की एंट्री मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश में मानसून की सामान्य एंट्री 15 जून तक हो जाती है। वर्ष 2021 में मानसून 9 जून को पहुंच गया था, जबकि 2018 में सबसे देरी से 25 जून को प्रवेश हुआ था। पिछले वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को आया था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 20, 2026, 04:23 IST
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