एक्सप्लेनर: कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल; क्यों कर रहे हैं आंदोलन, क्या है मराठा आरक्षण का पूरा विवाद?
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र में एक बार फिर आंदोलन जारी है। मनोज जरांगे पाटिल 29 अगस्त से जालना जिले के अंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल उनसे बातचीत कर चुका है, लेकिन जरांगे ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सरकार को 11 सितंबर तक का समय दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल अभी मनोज जरांगे की क्या मांग है सरकार की तरफ से क्या कहा जा रहा है जरांगे सरकार के आश्वासन से क्यों नहीं मान रहे मराठा आरक्षण का मुद्दा कितना पुराना है कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जरांगे पाटिल मूलत: बीड जिले के रहने वाले हैं। मटोरी गांव में जन्मे मनोज ने 12वीं तक पढ़ाई की है। आजीविका के लिए बीड से जालना आ गए। यहां एक होटल में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक कार्य शुरू किए। इसी दौरान शिवबा नामक संगठन की स्थापना की। मनोज 2011 से मराठा आरक्षण के आंदोलन में सक्रिय हैं। 2014 में उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में डिविजनल कमिश्नरेट के खिलाफ अपने मार्च से सभी का ध्यान खींचा था। 2015 से 2023 के बीच उन्होंने 30 से ज्यादा आंदोलन किये। 2021 में उन्होंने जालना जिले के साष्टा पिंपलगांव में 90 दिनों की हड़ताल की थी। बताया जाता है कि मनोज जरांगे की आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन उन्होंने खुद को मराठा समुदाय के लिए समर्पित कर दिया है। उनके पास चार एकड़ जमीन थी, जिसमें से दो एकड़ जमीन उन्होंने मराठा समुदाय के आंदोलन के लिए बेच दी थी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 04, 2026, 19:07 IST
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