बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा सौदा: 53,000 करोड़ में आईडीबीआई बैंक खरीदेगी फेयरफैक्स,केंद्र को मिलेगी मदद

आईडीबीआई बैंक को बेचने की सरकार की वर्षों पुरानी जद्दोजहद अपने मुकाम पर पहुंचती दिख रही है। वित्त मंत्रालय में मंगलवार को हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद सरकार और कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स होल्डिंग्स के बीच इस बहुप्रतीक्षित सौदे पर सहमति बन गई है। इसके तहत, कंपनी 53,000 करोड़ रुपये में बैंक में बहुलांश हिस्सा खरीदेगी। यह सौदा न सिर्फ विनिवेश के मोर्चे पर सरकार की मदद करेगा, बल्कि भारतीय बैंकिंग के इतिहास में एक नया अध्याय भी लिखेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाले मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह को इस संशोधित बोली से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना और अभिरुचि पत्र जारी किया जाएगा, जिसके बाद शेयर-परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होंगे। चूंकि, फेयरफैक्स एक प्रवर्तक के रूप में हिस्सेदारी ले रही है, इसलिए कंपनी को आम शेयरधारकों के लिए एक ओपन ऑफर भी लाना होगा। नई कीमत पर, सरकार बैंक में अपनी 45.48 फीसदी में से 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 26,620 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इसके अलावा, बैंक में 50 फीसदी से थोड़ी कम हिस्सेदारी रखने वाला भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) भी अपना 30.24 फीसदी हिस्सा बेचने की योजना बना रहा है। टूटेगा पिछला रिकॉर्ड भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश साल 2025 में देखा गया था, जब एमिरेट्स एनबीडी ने 2.75 अरब डॉलर में आरबीएल बैंक की 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। आईडीबीआई बैंक का यह सौदा उस रिकॉर्ड को लगभग दोगुना कर देगा। फेयरफैक्स के लिए आगे कुछ बैंकिंग नियमों का पालन करना होगा। फेयरफैक्स की भारतीय इकाई के पास पहले से ही सीएसबी बैंक में 40 फीसदी हिस्सेदारी है। बैंकिंग नियमों के मुताबिक, प्रवर्तक को सीएसबी और आईडीबीआई बैंक का आपस में विलय करना होगा, जिसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक कुछ अतिरिक्त समय दे सकता है। इसके अलावा, इस सौदे को अंतिम रूप देने से पहले आरबीआई की फिट एंड प्रॉपर जांच और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की मंजूरी भी जरूरी होगी। बजटीय लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में परिसंपत्ति मुद्रीकरण के जरिये 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से अब तक वह सिर्फ 20,272 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है। आईडीबीआई बैंक से मिलने वाले 26,620 करोड़ रुपये के बाद सरकार इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच जाएगी। इसके बाद सरकार कोल इंडिया और एलआईसी जैसी कंपनियों में भी अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकती है। ये होगी सबसे लंबी विनिवेश प्रक्रिया आईडीबीआई बैंक की निजीकरण प्रक्रिया भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे लंबे समय तक खिंचने वाले विनिवेश मामलों में एक है। इसकी शुरुआत 21 जनवरी, 2019 में हुई थी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 16, 2026, 02:10 IST
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