FAR की चाबी पड़ोसी के हाथ: एक लेंटर पर टिकी दो इंडस्ट्री, 44 साल पहले की गलती कैसे सुधारेगा चंडीगढ़ प्रशासन

मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बढ़े हुए एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) का लाभ शहर के 150 से अधिक छोटे उद्योगपति नहीं उठा पाएंगे। वजह यह है कि उनके औद्योगिक प्लॉट साझा ढांचे (कॉमन स्ट्रक्चर) पर बने हैं। ऐसे में यदि कोई एक उद्योगपति अपने हिस्से का पुनर्निर्माण कर एफएआर लेना चाहता है तो उसे पड़ोसी उद्योगपति की भी सहमति लेनी होगी। दोनों के एक साथ ढांचा गिराने पर ही नया निर्माण संभव होगा। उद्योगपतियों का कहना है कि यह स्थिति प्रशासन की पुरानी योजना का परिणाम है। वर्ष 1982 में इंडस्ट्रियल एरिया विकसित करते समय प्रशासन ने पहले एक-एक कनाल के संयुक्त ढांचे बनाए। बाद में इन्हें बीच में दीवार बनाकर 10-10 मरला के दो प्लॉटों में विभाजित कर अलग-अलग उद्यमियों को आवंटित कर दिया। इसी कारण आज भी कई प्लॉट 100-100ए, 408-408ए और 438-438ए जैसे नंबरों से दर्ज हैं, लेकिन उनका स्ट्रक्चर एक ही है। अब मास्टर प्लान-2031 में अतिरिक्त एफएआर का लाभ केवल पुनर्निर्माण की शर्त पर दिया जा रहा है। ऐसे में कोई एक मालिक अकेले अपना हिस्सा नहीं तोड़ सकता। पड़ोसी की सहमति के बिना नया निर्माण संभव नहीं है, जिससे 150 से अधिक उद्योगपति असमंजस में हैं। बॉक्स टाइप स्ट्रक्चर की मांग उद्योगपतियों ने प्रशासन से मांग की है कि पांच और दस मरला के औद्योगिक प्लॉटों पर बॉक्स टाइप स्ट्रक्चर की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि इससे सीमित क्षेत्र में बेहतर उपयोग हो सकेगा और ग्राउंड कवरेज भी बढ़ेगी। उनका तर्क है कि इंडस्ट्रियल एरिया की अधिकांश छोटी इकाइयां मुख्य उद्योगों को कच्चा माल और पार्ट्स उपलब्ध कराने वाली सर्विस इंडस्ट्री हैं, जिन्हें वहीं काम करना पड़ता है। 'मैं तोड़ना नहीं चाहता, पड़ोसी बनाना चाहता है' प्लॉट नंबर 438 के उद्योगपति साहिल गर्ग का कहना है कि उनका मौजूदा ढांचा ठीक है और केवल एफएआर के लिए उसे तोड़ना व्यावहारिक नहीं है। इसमें भारी खर्च भी आएगा। दूसरी ओर 438-ए में कार्यरत लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष का कहना है कि यदि वे पुनर्निर्माण करना भी चाहें तो साझा ढांचे के कारण ऐसा नहीं कर सकते। इसी तरह प्लॉट नंबर 408 के जरनैल सिंह ने बताया कि जब तक उनके पड़ोसी भूपिंदर सिंह (408-ए) सहमत नहीं होंगे, तब तक वे भी नया निर्माण नहीं करा सकते। यह प्लॉट हम लोगों ने तो सिर्फ खरीदे थे, बनाए तो प्रशासन ने थे। उद्यमियों की मजबूरी है कि वह इंफ्रास्ट्रक्चर को तोड़ नहीं सकते हैं तो एफएआर के लिए कोई विकल्प निकालना होगा। - सुनील क्षेत्रपाल, उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती यह अजीब सी स्थिति है। मास्टर प्लान 2031 में प्रस्तावित एफएआर ऐसी इंडस्ट्री को बिना शर्त के दी जानी चाहिए। तभी यह इंडस्ट्री काम कर पाएंगी। -नवीन मंगलानी, उपाध्यक्ष, चंडीगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 29, 2026, 11:42 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




FAR की चाबी पड़ोसी के हाथ: एक लेंटर पर टिकी दो इंडस्ट्री, 44 साल पहले की गलती कैसे सुधारेगा चंडीगढ़ प्रशासन #CityStates #Chandigarh-punjab #FarInChandigarh #ChandigarhAdministration #MasterPlan2031 #SubahSamachar