दर्द का एक साल: पठानकोट में 365 दिन बाद भी नहीं भरे बाढ़ के जख्म, कई पीड़ित अब भी मुआवजे के इंतजार में

पठानकोट के बॉर्डर एरिया में पिछले साल 26-27 अगस्त की दरमियानी रात आई भीषण बाढ़ को एक साल हो गया है लेकिन प्रभावित लोगों के जख्म आज भी ताजा हैं। रंजीत सागर डैम से रावी दरिया में अचानक लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद माधोपुर हाइडल चैनल और माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेटों की स्थिति बिगड़ गई। पानी घरों खेतों और सड़कों में घुस गया। रावी किनारे बसे एक गुज्जर परिवार के दो बच्चों और एक महिला की पानी में बहने से मौत हो गई। 26 अगस्त 2025 की शाम रंजीत सागर डैम का जलस्तर 527.91 मीटर पहुंच गया था जो खतरे के निशान से ऊपर था। इसके बाद डैम के गेट खोलकर रावी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा गया। माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेट जाम होने से पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के घरों तक पहुंच गया। जाम गेट खोलने के लिए सिंचाई विभाग के करीब 50 कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान गेट टूटने से एक कर्मचारी पानी में डूब गया। बाकी कर्मचारी भी पानी के बीच फंस गए जिन्हें वायुसेना ने सुरक्षित बाहर निकाला। गेट टूटने के बाद पानी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। उस समय पाकिस्तान की तरफ भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने की बात सामने आई थी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 27, 2026, 04:18 IST
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