सेहत से जुड़ी बात: असंतुलित खानपान और जींस के मेल से बढ़ रहा है कोलेस्ट्रॉल का खतरा, बचाव के उपाय क्या?

भारत में खानपान की बदलती आदतें सेहत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। एक नए अध्ययन में संकेत मिला है कि भोजन में फल, सब्जियों और दालों की कमी उन लोगों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती है, जिनमें मधुमेह से जुड़े कुछ खास जींस मौजूद हैं। ऐसे लोगों में असंतुलित यानी कम पौष्टिक खानपान के साथ खून में कुल कोलेस्ट्रॉल और खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया गया। 452 पुरुष और 568 महिलाओं पर अध्ययन मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग से जुड़े शोधकर्ताओं ने चेन्नई में 25 से 80 वर्ष की आयु के 1,020 वयस्कों पर यह अध्ययन किया। इनमें 452 पुरुष और 568 महिलाएं शामिल थीं। अध्ययन के निष्कर्ष वैज्ञानिक जर्नल पीएलओएस वन में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने लोगों के जींस, खानपान और खून में शर्करा व कोलेस्ट्रॉल के स्तर के बीच संबंधों का विश्लेषण किया। तीन आनुवंशिक बदलावों का विश्लेषण जींस शरीर को कई विशेषताएं देने और उसके कामकाज को प्रभावित करने वाले आनुवंशिक निर्देश होते हैं। इनमें कुछ बदलाव मधुमेह जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति में ऐसे बदलाव होने का मतलब यह नहीं कि उसे बीमारी होगी ही। खानपान, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली भी सेहत को प्रभावित करते हैं।अध्ययन में वैज्ञानिकों ने तीन आनुवंशिक बदलावों का विश्लेषण किया। इनमें टीसीएफ सेवन एल टू और एफटीओ नामक जींस से जुड़े बदलाव शामिल थे। इनका संबंध मधुमेह या शरीर के वजन से जुड़े जोखिमों से पाया गया है। शोधकर्ताओं ने भारतीय आहार गुणवत्ता सूचकांक की मदद से यह भी आंका कि प्रतिभागियों का भोजन कितना पौष्टिक और संतुलित था। कम पौष्टिक भोजन के साथ बढ़ा जोखिम अध्ययन में अधिक आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में खाली पेट खून में शर्करा का स्तर और एचबीए 1 सी भी अधिक पाया गया। एचबीए 1 सी खून की जांच का एक पैमाना है, जिससे पिछले लगभग दो से तीन महीनों के औसत रक्त शर्करा स्तर का अंदाजा मिलता है।सबसे अहम निष्कर्ष उन लोगों को लेकर सामने आया, जिनमें आनुवंशिक जोखिम अधिक था और जिनका खानपान भी कम पौष्टिक था। इस समूह में कुल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों की तुलना में अधिक पाया गया।एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा लंबे समय तक अधिक रहने से धमनियों में वसा जमने और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अध्ययन में सामने आया संबंध यह नहीं बताता कि हर व्यक्ति में ऐसा ही होगा। सफेद चावल ही समस्या नहीं अध्ययन से जुड़े यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर विमल करानी के मुताबिक भारत में खानपान तेजी से बदल रहा है और इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अधिक मात्रा में सफेद चावल खाने और भोजन में फल-सब्जियों की कमी का संबंध कुछ आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में अधिक कोलेस्ट्रॉल से हो सकता है। बढ़े कोलेस्ट्रॉल का कारण इसका अर्थ यह नहीं है कि सफेद चावल खाने से हर व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाएगा। चिंता तब अधिक हो सकती है, जब भोजन में पोषक तत्वों और खाद्य पदार्थों की विविधता कम हो। शोधकर्ताओं ने खानपान की गुणवत्ता का आकलन किया था, इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को अकेले बढ़े कोलेस्ट्रॉल का कारण मानना उचित नहीं होगा। थाली में बदलाव से मिल सकती है मदद विशेषज्ञों के मुताबिक, भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें और बीन्स जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साबुत अनाज को प्राथमिकता देना और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना भी उपयोगी हो सकता है। साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जरूरी हैं।शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में आनुवंशिक जांच से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन लोगों को खानपान में बदलाव से अधिक लाभ हो सकता है। लेकिन फिलहाल केवल जींस के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का भविष्य तय नहीं किया जा सकता। डायबिटिक लोगों में स्वस्थ खान-पान का विशेष महत्व स्वस्थ खानपान सभी के लिए जरूरी है, लेकिन डायबिटिक लोगों में इसका महत्व और बढ़ सकता है। जींस जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं, मगर संतुलित भोजन और बेहतर जीवनशैली सेहत की रक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 22, 2026, 04:16 IST
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