UN में भारत बोला: पाकिस्तान दुष्प्रचार में लिप्त, हम अल्पसंख्यकों के अधिकार पर प्रतिबद्ध, कश्मीर पर क्या जवाब?

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मंच का दुरुपयोग कर दुष्प्रचार फैलाने के लिए पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। नई दिल्ली ने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। भारत ने पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को खाली करने की मांग भी की। इसके साथ ही, भारत ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों और जलवायु परिवर्तन से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को अपने नागरिकों के कल्याण पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सैन्य निर्देशों पर काम करने के बजाय आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। पुरी ने भारत की अल्पसंख्यक प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा राज्यों का संप्रभु कर्तव्य है। भारत की सांविधानिक सुरक्षाएं धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विविधता को दर्शाती हैं। भारतीय राजनयिक ने यह भी रेखांकित किया कि अल्पसंख्यकों ने भारत के राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 23 अक्तूबर को भारत ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति पाकिस्तान के व्यवहार पर भी उसे फटकारा था। भारत ने इस्लामाबाद पर कमजोर समुदायों की रक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। क्या पाकिस्तान ने UN मंच का दुरुपयोग किया भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने कहा कि पाकिस्तान ने अनुमान के मुताबिक दुष्प्रचार के लिए मंच का दुरुपयोग किया। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। पुरी ने पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्र को खाली करने की मांग की। उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को अपने लोगों के कल्याण को प्राथमिकता देने की सलाह दी। भारत ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा को राज्यों का संप्रभु कर्तव्य बताया। अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान के दावों पर भारत का क्या रुख था भारत ने 23 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति पाकिस्तान के व्यवहार पर उसे लताड़ा। भारत ने इस्लामाबाद पर कमजोर समुदायों की रक्षा न करने का आरोप लगाया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के उपचार पर नई दिल्ली को उपदेश देने का प्रयास कर रहा है। प्रथम सचिव भाविका मंगलानंद ने COVID-19 महामारी के दौरान धार्मिक भेदभाव पर एक रिपोर्ट पर सवाल उठाया। उन्होंने आतंकवादियों के अंतिम संस्कार अधिकारों की वकालत करने वाले रिपोर्ट के दृष्टिकोण पर भी आपत्ति जताई। भारत ने जलवायु परिवर्तन पर क्या प्रतिबद्धता जताई भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का दृष्टिकोण समानता, जलवायु न्याय और सतत विकास पर आधारित है। उप सचिव बरखा ताम्रकार ने न्याय प्रणालियों की भूमिका पर एक रिपोर्ट पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर वैश्विक चुनौती मानता है। भारत का दृष्टिकोण संविधान, व्यापक कानून और एक स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा समर्थित है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जीवन और समानता के मौलिक अधिकारों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के खिलाफ महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय माना है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 25, 2026, 07:57 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




UN में भारत बोला: पाकिस्तान दुष्प्रचार में लिप्त, हम अल्पसंख्यकों के अधिकार पर प्रतिबद्ध, कश्मीर पर क्या जवाब? #World #National #UnitedNation #RaghooPuri #SubahSamachar