Iran Israel War: जयराम रमेश ने सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल, भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने किया पलटवार
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद भारत की राजनीति में भी तीखी बयानबाजी देखने को मिली। कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi की कथित चुप्पी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत सरकार की ओर से स्पष्ट और त्वरित प्रतिक्रिया न आना चिंताजनक है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति पहले की तुलना में कमजोर दिखाई दे रही है और सरकार को ऐसे वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि ईरान लंबे समय से भारत का मित्र देश रहा है और वहां के शीर्ष नेता की मौत जैसे बड़े घटनाक्रम पर सरकार की ओर से तुरंत प्रतिक्रिया आनी चाहिए थी। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि जब दुनिया के कई देशों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी, तब भारत सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया और मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार की विदेश नीति “विश्वगुरु” की छवि के दावों के विपरीत दिखाई दे रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत को संतुलित और सिद्धांत आधारित नीति अपनानी चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति में सरकार की प्रतिक्रिया अस्पष्ट और देर से दिखाई देती है। कांग्रेस का आरोप है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत को सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभानी चाहिए थी। पार्टी ने यह भी मांग की कि संसद में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा कराई जाए ताकि सरकार अपनी विदेश नीति और रुख को स्पष्ट कर सके। हालांकि कांग्रेस के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी कड़ा पलटवार किया गया। भाजपा नेता Gaurav Vallabh ने जयराम रमेश के बयान को राजनीतिक अवसरवाद बताते हुए कहा कि कांग्रेस हर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को घरेलू राजनीति से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषयों पर बिना पूरी जानकारी के बयान देना गैरजिम्मेदाराना है। गौरव वल्लभ ने यह भी कहा कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय मामलों में संतुलित और कूटनीतिक तरीके से काम करती है और हर बयान सार्वजनिक रूप से देना जरूरी नहीं होता, क्योंकि कई बार कूटनीति पर्दे के पीछे भी चलती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना है, जबकि सरकार राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को ध्यान में रखकर कदम उठाती है। इस बयानबाजी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक तरफ कांग्रेस सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की अनावश्यक राजनीति बता रही है। कुल मिलाकर, खामेनेई की मौत के बाद भारत में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और सरकार की विदेश नीति को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 14, 2026, 04:06 IST
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