न्याय, समानता और विधि का शासन लोकतंत्र की आधारशिला : राज्यपाल

धर्मशाला। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि न्याय, समानता और विधि का शासन भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला हैं। संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की गरिमा और न्याय तक समान पहुंच की गारंटी भी है। उन्होंने कहा कि न्याय का अर्थ केवल अदालतों से निर्णय प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक ऐसा समाज बनाना है, जहां हर नागरिक स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।डिग्री कॉलेज धर्मशाला के सभागार में सोमवार को भारत सरकार के न्याय विभाग की ओर से आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव में राज्यपाल ने न्याय प्रबोध-अवेकनिंग टू जस्टिस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 39(क) के तहत राज्य का दायित्व है कि आर्थिक या अन्य किसी अक्षमता के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे और उसे निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय व भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम राज्य में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म, तकनीक आधारित समाधान, विधिक जागरूकता अभियान और स्थानीय सहायता तंत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। दिशा, टेली-लॉ, न्याय बंधु और विधिक साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से न्याय को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा रहा है।12 वर्षों में केंद्र सरकार ने खत्म किए 1725 अप्रासंगिक कानून : मेघवालकार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों संविधान से शक्ति प्राप्त करती हैं और राष्ट्र निर्माण में एक-दूसरे की पूरक हैं। सरकार की प्राथमिकता दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। कॉमन सर्विस सेंटर और टेली-लॉ जैसी पहलें उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई हैं, जिन्हें भौगोलिक या आर्थिक कारणों से अदालतों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। इन माध्यमों से नागरिक विशेषज्ञ अधिवक्ताओं से निःशुल्क कानूनी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी फीस केंद्र सरकार वहन करती है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने 1,725 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त अथवा संशोधित किया है। अंग्रेजों के समय के कानूनों का उद्देश्य दंड देना था, जबकि वर्तमान व्यवस्था का उद्देश्य न्याय प्रदान करना है। इसी सोच के तहत भारतीय दंड संहिता के स्थान पर नई भारतीय न्याय संहिता लागू की गई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 15, 2026, 18:57 IST
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