India-Russia: 'तीसरे देशों का दबाव भारत-रूस के रिश्तों पर नहीं डालेगा असर', ब्रिक्स बैठक में रूस का बड़ा एलान
भारत और रूस की दोस्ती अब एक नए मुकाम पर पहुंचने वाली है। दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक साथ मिलकर काम करने का बहुत बड़ा फैसला लिया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ कर दिया है कि भारत और रूस मिलकर हथियारों का निर्माण करेंगे और अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और ज्यादा मजबूत करेंगे। इसके साथ ही, किसानों के लिए बेहद जरूरी उर्वरक (खाद) की आपूर्ति को भी स्थिर रखने पर दोनों देशों में पूरी सहमति बनी है। यह कदम भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बातचीत के दौरान रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ इन गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत में यह भी तय हुआ कि पीएम मोदी इस साल रूस के दौरे पर जाएंगे। इसके लिए एक बड़े स्तर के शिखर सम्मेलन की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। लावरोव ने बताया कि दोनों देशों की साझेदारी बहुत गहरी हो चुकी है। अब व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को लगातार कम किया जा रहा है और लेन-देन राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है, ताकि तीसरे देशों के नकारात्मक दबाव का असर आपसी व्यापार पर बिल्कुल न पड़े। ये भी पढ़ें-Israel Attack Gaza:गाजा में हमास का बड़ा हवाई हमला, निशाने पर हमास का सबसे बड़ा कमांडर; कई लोगों की मौत अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत-रूस तेल व्यापार पर क्या बोले लावरोव अमेरिका की तरफ से रूसी तेल न खरीदने के दबाव को लेकर भी लावरोव ने अपनी बात बिल्कुल साफ की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर भारत और रूस के रिश्तों पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। भारत जिन भी क्षेत्रों में रूस के साथ काम करना चाहता है, रूस उसके लिए पूरी तरह से तैयार है। लावरोव ने स्पष्ट किया कि भारत की तरफ से जब भी ऊर्जा और तेल की मांग बढ़ती है, रूस हमेशा उसका सकारात्मक जवाब देता है। यही वजह है कि भारत में रूसी तेल की आपूर्ति काफी बढ़ी है और रूस को उम्मीद है कि भविष्य में भी इस आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आएगी। होर्मुज जलमार्ग बंद होने के पीछे रूस ने किसे ठहराया जिम्मेदार रूस ने होर्मुज जलमार्ग के बंद होने के मामले में ईरान को क्लीन चिट दे दी है। लावरोव ने इसके लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इस्राइल की आक्रामकता को जिम्मेदार बताया। मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका और इस्राइल द्वारा 28 फरवरी को बिना उकसावे के शुरू की गई कार्रवाई को ही इस बड़ी समस्या की जड़ बताया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि 28 फरवरी से पहले होर्मुज मार्ग में जहाजों की आवाजाही सौ प्रतिशत सुरक्षित थी। इसलिए इस संकट को ईरान ने जन्म नहीं दिया है, बल्कि यह सब अमेरिका और इस्राइल की आक्रामकता का ही नतीजा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में क्या भारत बन सकता है मध्यस्थ रूस का साफ मानना है कि भारत, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस गंभीर संकट को सुलझाने में एक बहुत बड़ी और प्रभावी भूमिका निभा सकता है। लावरोव ने सुझाव दिया है कि भारत अपने मजबूत कूटनीतिक अनुभव के दम पर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय के लिए एक मध्यस्थ (बीच-बचाव करने वाला) बन सकता है। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद लावरोव ने यह अहम बयान तब दिया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे पर थे। रूस का यह भरोसा दिखाता है कि दुनिया में भारत की कूटनीतिक ताकत को अब गंभीरता से लिया जा रहा है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: May 16, 2026, 03:29 IST
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