जिजीविषा: 60 की उम्र में सिलिकॉन वैली छोड़ अंटार्कटिका पहुंचीं मे ली, क्यों चुनी बर्फीले द्वीप की राह?

सिलिकॉन वैली में मोटे पैकेज पर आरामदायक कॉर्पोरेट जिंदगी बिताने वाले किसी व्यक्ति को अगर 59 वर्ष की आयु में कंपनी में छंटनी का शिकार होना पड़े, तब भी वह शायद रिटायरमेंट के बाद वाला शांत जीवन व्यतीत करना चाहेगा। लेकिन 60 वर्षीय मे ली ने इसे एक नए रोमांचक सफर की शुरुआत बना दिया। उन्होंने दुनिया के सबसे जुदा और बर्फीले रेगिस्तान वाले अंटार्कटिका में सप्लाई टेक्नीशियन के तौर पर काम शुरू करने का फैसला किया। ली ने पिछले वर्ष दिग्गज टेक कंपनी एचपी से छंटनी के बाद जो फैसला लिया, उसने साबित कर दिया कि रोमांच की कोई उम्र नहीं होती। अंटार्कटिका के सबसे बड़े अमेरिकी शोध केंद्र मैकमर्दो स्टेशन में सप्लाई टेक्नीशियन के तौर पर काम कर चुकीं मे ली अब ब्रॉडकास्ट इंजीनियर के तौर पर वापसी कर रही है। शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान, 24 घंटे खिली रहने वाली सूरज की रोशनी व दुनिया से कटे इस द्वीप पर जिंदगी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। कड़े अनुशासन का पालन करना जरूरी सिलिकॉन वैली का वर्क-कल्चर लचीला है, जबकि अंटार्कटिका में नियमों और अनुशासन का पालन बेहद सख्त है। मैकमर्दो स्टेशन पर काम के घंटे तय हैं-सोमवार से शनिवार, सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक। मे ली रोजाना सुबह 6:30 बजे उठती हैं। यहां न गाड़ियां हैं और न ही ट्रैफिक जाम का झंझट; हर जगह पैदल जाना पड़ता है। जब वह अक्तूबर में पहली बार यहां पहुंची थीं, तो वेयरहाउस के बाहर 2 फीट मोटी बर्फ जमी थी। काम शुरू करने से पहले रोज फावड़े से बर्फ हटाकर रास्ता साफ करना पड़ता था ताकि सामान की आवाजाही हो सके। ये भी पढ़ें:यमन के अदन एयरपोर्ट पर दो मिसाइलों से हमला: सऊदी समर्थित सैन्य ठिकाना बना निशाना; किसने बनाया निशाना मुश्किल से मिलते हैं ताजे फल-सब्जी दोपहर 11:30 बजे स्टेशन के कैफेटेरिया में कॉलेज कैम्पस की तर्ज पर बफे लंच शुरू होता है, जहां पिज्जा और बर्गर जैसे व्यंजन मिलते हैं। बर्फ के इस रेगिस्तान में ताजे फल, सब्जियों और अंडों को फ्रेशीज कहा जाता है और इनकी भारी किल्लत रहती है। अक्तूबर से नवंबर के बीच जब सी-17 मालवाहक विमान उतरते हैं, तब ताजे फल आते हैं। गर्मी बढ़ते ही बर्फ पिघलने लगती है और प्लेन की लैंडिंग बंद होने पर ताजे खान-पान पर सख्त राशनिंग लागू हो जाती है। सबसे निर्जन कोना बना खुशहाल आशियाना हफ्ते के छह दिन लोग कड़ी मेहनत से काम करते हैं और फिर छुट्टी में नाइटक्लब, म्यूजिक पार्टी और आइसस्टॉक जैसे गतिविधियों का लुत्फ उठाते हैं। रविवार को खास ब्रंच के बाद लोग हाइकिंग करते हैं या अंडरवॉटर ऑब्जर्वेशन ट्यूब में जाकर बिना पानी में उतरे बर्फ के नीचे का जलीय जीवन देखते हैं। मे ली का सफर बताता है कि इंसान अगर अपने आरामदायक जीवन के दायरे से थोड़ा बाहर निकले तो दुनिया का सबसे निर्जन कोना भी एक जीवंत आशियाना बन सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 17, 2026, 02:42 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »

Read More:
World



जिजीविषा: 60 की उम्र में सिलिकॉन वैली छोड़ अंटार्कटिका पहुंचीं मे ली, क्यों चुनी बर्फीले द्वीप की राह? #World #SubahSamachar