Mayor Elections: महापौर के लिए भाजपा में मंथन शुरू, महिला चेहरे पर दांव की तैयारी; चुनाव इस महीने के अंत में

एमसीडी के महापौर पद के लिए इस माह के अंत में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। इस पर पार्टी नेताओं ने मंथन शुरू कर दिया है। इस संबंध में प्रदेश स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के नेता भी चर्चा कर रहे हैं। पार्टी इस बार महिला सशक्तिकरण का संदेश देने के लिए महिला महापौर बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा किसी अनुभवी महिला पार्षद को इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंप सकती है। भाजपा के नेताओं के अनुसार, महिला महापौर के चयन के पीछे नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चल रहा राजनीतिक अभियान एक अहम कारण बन रहा है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस कानून के समर्थन में भाजपा दिल्ली में व्यापक स्तर पर जनसंपर्क अभियान चला रही है। ऐसे में महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाकर पार्टी एक मजबूत और स्पष्ट राजनीतिक संदेश देना चाहती है। इसके अलावा, एमसीडी में सत्ता संभालने के बाद महिला पार्षद को महापौर न बनाए जाने को भी इस निर्णय से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरे की तलाश में है जो न केवल अनुभवी हो, बल्कि एमसीडी के कामकाज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ भी रखता हो। महिला दावेदारों में स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा और नीमा भगत के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। दोनों ही नेता पूर्वी दिल्ली नगर निगम की महापौर रह चुकी हैं और संगठन व प्रशासन दोनों स्तरों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। इसके अलावा मध्य जोन वार्ड समिति की अध्यक्ष योगिता सिंह और स्थायी समिति की सदस्य अंजु भी संभावित दावेदारों की सूची में शामिल हैं। हालांकि, इस कवायद के बीच पुरुष पार्षद भी पीछे नहीं हैं और महापौर पद के लिए सक्रिय रूप से लॉबिंग कर रहे हैं। वर्तमान महापौर राजा इकबाल सिंह, उपमहापौर जयभगवान यादव, नेता सदन प्रवेश वाही, शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा और उपाध्यक्ष अमित खड़खड़ी के नाम भी चर्चा में हैं। ये सभी पार्षद अपने आकाओं के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के यहां अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा और भी रोचक हो गई है। एमसीडी में पूर्ण बहुमत होने के कारण भाजपा के सामने जीत की चुनौती नहीं है, लेकिन सही चेहरे के चयन की कसौटी जरूर है। महिला महापौर के जरिए पार्टी जहां संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश में है, वहीं आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति भी साफ दिखाई दे रही है। अब सबकी नजरें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं, जो अंतिम फैसला करेगा। आने वाले दिनों में महापौर पद के उम्मीदवार का नाम साफ हो जाएगा, लेकिन फिलहाल यह तय है कि इस बार एमसीडी का महापौर चुनाव भाजपा के भीतर ही दिलचस्प और कड़े मुकाबले का रूप ले चुका है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 15, 2026, 02:10 IST
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