National Doctors Day: ये हैं हिमाचल के फ्रंटलाइन के नायक; अस्पताल ही घर, मरीज परिवार
धरती पर सफेद कोट में चिकित्सक भगवान के रूप में छिपे हैं। मरीजों की सेवा के लिए चिकित्सकों ने जैसे अस्पताल को ही घर बना दिया है। दिन-रात मरीजों की तीमारदारी में मशगूल चिकित्सकों के लिए अपने परिवार को समय दे पाना भी बेहद कठिन हो जाता है। सुबह ओपीडी में बैठने के बाद, मरीजों की लंबी कतारों के बीच कब सुबह से शाम और शाम से अंधेरा हो जाता है, उन्हें खुद पता नहीं रहता। इसके बाद आपातकालीन कक्ष में सेवाएं और वार्ड के राउंड की व्यस्तता के बीच पूरादिन बीत जाता है। यही नहीं मरीजों का चिकित्सकों पर इतना विश्वास है कि स्थानांतरण के बाद पुराने क्षेत्र से मरीज चिकित्सकों को ढूंढते हुए दुर्गम क्षेत्रों के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। राजधानी और दुर्गम क्षेत्र में ऐसे ही चिकित्सक रोज काम कर रहे हैं जिन्होंने प्रशासनिक गतिविधियों की जिम्मेदारी के साथ ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर भी संभाला हुआ है। सेवा भाव के काम के साथ आपदा और किसी भी प्रकार की महामारी में फ्रंट लाइन में रहकर अहम भूमिका निभा रहे हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 30, 2026, 21:45 IST
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