Mandi News: न पानी, न सिंचाई... हर माह 15 हजार का बिजली बिल
सुंदरनगर (मंडी)। बल्ह की चड़याल पंचायत में एक सिंचाई योजना का पंप हाउस तीन साल से ठप है। इसके बावजूद जल शक्ति विभाग हर महीने करीब 15 हजार रुपये बिजली बिल का भुगतान कर रहा है। पिछले सात महीने से इस पंप हाउस का ट्रांसफार्मर भी खराब पड़ा है।यह स्थिति सरकारी धन के खर्च और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। पंप हाउस करीब दस साल तक क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा देता रहा था। अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद पेयजल आपूर्ति भी बंद हो गई है। किसान देवकांत, भूप सिंह, राम सिंह, चेत राम, कन्हैया लाल और लालमन ने बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना 200 बीघा जमीन को सिंचित करने के लिए थी। लेकिन मौजूदा समय में यह योजना सफेद हाथी बनकर रह गई है। किसानों ने योजना को सुचारु रूप से चलाने की मांग की है।विभाग का तर्कजल शक्ति विभाग ने इस मामले पर अपना तर्क प्रस्तुत किया है। विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में किसानों ने सिंचाई के लिए पानी नहीं मांगा था। इसके बाद इसी पंप से चक्कर क्षेत्र में पीने के पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। करीब सात महीने पहले ट्रांसफार्मर खराब होने से यह व्यवस्था भी बाधित हो गई। विभाग का कहना है कि जब तक बिजली का कनेक्शन चालू रहेगा, विद्युत बोर्ड बिल जारी करेगा। इसलिए औसतन 15 हजार रुपये प्रतिमाह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है।आगामी कार्रवाईजल शक्ति मंडल बग्गी के अधिशासी अभियंता कमल ने इस पर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ट्रांसफार्मर खराब होने की सूचना बिजली बोर्ड को कई बार दी गई है। पंप हाउस के लिए किसानों की पानी की मांग भी इक्का-दुक्का ही है। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों से फील्ड रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।मैं इस मुद्दे को जिला परिषद की बैठक में उठाऊंगा, ताकि पंप हाउस की कार्यप्रणाली को जवाबदेह बनाया जा सके। विभाग से इसकी उपयोगिता और बिजली बिलों की रिपोर्ट भी मांगी है। -डिंपल सैनी, जिला परिषद सदस्य, गोड़ा गागलकिसानों को आज भी सिंचाई के लिए इसकी जरूरत है। विभागीय कार्यशैली के कारण पंप हाउस बार-बार बंद रहता है। इसे जल्द ठीक करवाकर किसानों को सुविधा देनी चाहिए। -रवि ठाकुर, स्थानीय किसानविभाग को किसानों की कमेटी गठित करवाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पंप हाउस की वर्तमान में कितनी उपयोगिता है। अब यह सफेद हाथी बनकर रह गया है। -भगत सिंह, स्थानीय किसान
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 31, 2026, 00:20 IST
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