आंकड़ों का दूसरा पहलू: गरीबी कम करने के मोर्चे पर भारत की बड़ी उपलब्धि, पिछले दशक में गरीब परिवारों को सहारा

विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट गरीबी कम करने के मोर्चे पर भारत द्वारा पिछले एक दशक में की गई उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करती है। रिपोर्ट कहती है कि 2011 में देश की 57.7 फीसदी आबादी प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम पर गुजारा कर रही थी, जबकि 2023 तक यह अनुपात घटकर 16.1 फीसदी रह गया। इस अवधि में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए। यही नहीं, तीन डॉलर प्रतिदिन से कम पर जीवनयापन करने वाली आबादी का अनुपात 27.1 फीसदी से घटकर 2.6 फीसदी रह गया। इस प्रगति के पीछे आर्थिक गतिविधियों में विस्तार, घरेलू उपभोग में वृद्धि और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की भूमिका रही है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से 2023 के बीच देश में करीब 13.4 करोड़ रोजगार जुड़े। यह वृद्धि कामकाजी उम्र की आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी थी। इसमें ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी योगदान रहा। दूसरी ओर, खाद्य सब्सिडी और मुफ्त अनाज वितरण की व्यवस्था ने गरीब परिवारों के खर्च का बड़ा बोझ कम किया। इसके अलावा, बहुआयामी गरीबी का अनुपात वर्ष 2005-06 के 53.8 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 15.5 प्रतिशत रह गया। लेकिन, रिपोर्ट के कुछ निष्कर्ष इस उपलब्धि के दूसरे पहलू की ओर भी ध्यान दिलाते हैं। नए रोजगारों का बड़ा हिस्सा कम उत्पादकता वाले कामों में है। युवाओं में बेरोजगारी दर भी एक वर्ष में 14.6 फीसदी से बढ़कर 15.9 प्रतिशत हो गई। एक बहुत बड़ी आबादी अब भी 4.20 डॉलर प्रतिदिन की सीमा से नीचे है। ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जो इस सीमा से थोड़ा ही ऊपर हंै और स्थितियां प्रतिकूल होने पर वे फिर से गरीबी के दलदल में धंस सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी घटने की गति शहरों के मुकाबले तेज रही है। फिर भी, 4.20 डॉलर वाली गरीबी रेखा के आधार पर ग्रामीण गरीबी 19.3 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट है कि गांवों में आर्थिक अवसरों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत अभी बनी हुई है। विश्व बैंक की रिपोर्ट भारत की विकास यात्रा की एक बड़ी उपलब्धि को सामने लाती है। लेकिन, अगली चुनौती इससे कहीं अधिक कठिन है। पिछले दशक में सरकारी योजनाओं व सामाजिक सुरक्षा के जरिये गरीब परिवारों को सहारा देने का काम हुआ है। अब इस आधार पर बेहतर आमदनी, अधिक उत्पादक रोजगार और आर्थिक सुरक्षा की इमारत खड़ी करनी होगी। आखिरकार, गरीबी से स्थायी मुक्ति का रास्ता लोगों की अपनी आय अर्जित करने की क्षमता बढ़ाने से होकर जाता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 03, 2026, 06:47 IST
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