Parliament: लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव का मामला; ओम बिरला कर सकेंगे मतदान, नहीं करेंगे अध्यक्षता
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार, 9 मार्च से होगी। इसी दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। बिरला इस दौरान कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे बल्कि अन्य सांसदों के साथ बैठेंगे। हालांकि बिरला को अपना बचाव करने का अधिकार होगा, साथ ही वह प्रस्ताव पर होने वाले मतदान में भी शामिल हो सकेंगे।संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने बताया कि नियमों और तय प्रक्रिया के अनुसार, जब निचले सदन में प्रस्ताव पर चर्चा होगी तो बिरला को अपना बचाव करने का अधिकार होगा। साथ ही उन्हें प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने का भी अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि जब उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर सदन में विचार किया जाएगा तो वह कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं। उन्हें सत्तापक्ष के सांसदों के साथ बैठना होगा। यह भी पढ़ें - उपलब्धि: नीतिगत सुधारों से बदली सूरत, स्टार्टअप-निवेशकों के लिए पहली पसंद बना भारत; उद्योग जगत का भरोसा मजबूत लोकसभा के पूर्व महासचिव आचार्य ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में अध्यक्ष जिस सीट पर बैठते हैं, उस सीट का आवंटन नियमों में नहीं बताया गया है। उन्होंने बताया कि बिरला स्वचालित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल कर प्रस्ताव पर वोट नहीं कर पाएंगे, बल्कि उन्हें अपना वोट पंजीकरण करने के लिए एक स्लिप भरनी होगी। ब्यूरो बिरला को राज्यसभा से आने वाले मंत्री की सीट दी जा सकती है आचार्य का मानना है कि राज्यसभा से आने वाले किसी केंद्रीय मंत्री की सीट उन्हें दी जा सकती है, क्योंकि केवल लोकसभा सदस्य ही प्रस्ताव के पक्ष या विपक्ष में वोट दे पाएंगे। उन्होंने बताया कि लोकसभा के उपाध्यक्ष और राज्यसभा के उपसभापति के लिए उनके अपने-अपने सदनों में तय सीटें होती हैं, जब वे अध्यक्षता नहीं कर रहे होते हैं। विपक्ष की बेंचों में आगे की सीटें उन्हें दी जाती हैं। यह भी पढ़ें - Cyber Attacks: भारत ने रोके 4.7 करोड़ साइबर हमले; हर दिन करीब 1.3 लाख वेब आधारित खतरों का करना पड़ा सामना प्रस्ताव पर दो सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी आचार्य ने बताया कि अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम दो लोकसभा सदस्यों को नोटिस पर हस्ताक्षर करना होगा। हालांकि नोटिस पर कितने भी सदस्य हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन कम से कम दो के हस्ताक्षर होने जरूरी है। अध्यक्ष को सदन में सामान्य बहुमत से पास किए गए प्रस्ताव से पद से हटाया जा सकता है। संविधान के आर्टिकल 94सी में ऐसे कदम के लिए नियम हैं। उन्होंने बताया कि बहुमत की गिनती के लिए सदन के सभी सदस्यों की गिनती की जाती है, न कि मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों की, जो कि आम बात है। इसका मतलब है कि खाली सीटों को छोड़कर, सदन की असरदार सदस्यता का इस्तेमाल बहुमत का हिसाब लगाने के लिए किया जाता है। अन्य वीडियो
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 06, 2026, 05:57 IST
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