Alert: प्लास्टिक की चीजें शरीर में बढ़ा रही हैं हानिकारक रसायन, प्रजनन क्षमता और दिमाग दोनों हो सकता है कमजोर

प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। प्लास्टिक कचरे से न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, साथ ही प्लास्टिक के सूक्ष्म कण (माइक्रोप्लास्टिक) इंसानी स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार प्लास्टिक के डब्बे में खाना खाने और प्लास्टिक के बोतलों से पानी पीने से बचने की चेतावनी देते रहे हैं। प्लास्टिक की चीजों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण न सिर्फ शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बढ़ती जा रही है साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बिस्फेनॉल ए (बीपीए) नामक रसायन भी चिंता का कारण बना हुआ है। बिस्फेनॉल-ए (बीपीए) एक औद्योगिक रसायन है जिसका उपयोग प्लास्टिक की चीजों के निर्माण में किया जाता है। फूड कंटेनर, दूध की बोतलें और प्लास्टिक की पानी की बोतलें भी इससे तैयार की जाती हैं। साल 2008 में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने एक अध्ययन में बतायाकि 92% अमेरिकी वयस्कों के यूरिनसैंपल में इसकी उपस्थिति देखी गई। लोगों ने सवाल करना शुरू कर दिया कि यह रसायन उनके शरीर में कैसे पहुंचा कई अध्ययनकर्ता बताते हैं कि जिस तरह से हमारे दैनिक जीवन में प्लास्टिक का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है इसके कारण शरीर में ये रसायन भी बढ़ रहा है।इससे भविष्य में कई प्रकार के गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 10, 2025, 12:41 IST
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