एफसीआरए विधेयक पर सियासी घमासान: पक्ष और विपक्ष आए आमने-सामने; किरेन रिजिजू का दावा, एमके स्टालिन के आरोप

केंद्र के प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन बिल 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। इसे लेकर जहां भाजपासिर्फ अवैध खातों पर असर होने की बात कर रही है, वहीं डीएमके सुप्रीमो और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पीएम मोदी पर करारा हमला बोला है और कहा कि पीएम का ईसाई कार्यक्रमों में जाना सिर्फ दिखावा है। यह भी पढ़ें - सुप्रीम कोर्ट: साक्षरता बढ़ी, कई पहल हुए लेकिन घरेलू हिंसा नहीं रुकी; यह रोग ग्रस्त सामाजिक व्यवस्था का संकेत झूठ फैलाने वालों को करेंगे बेनकाब- रिजिजू केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों को पहले से कहीं ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। एफसीआरए संशोधन से केवल अवैध खातों पर ही असर पड़ेगा।कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए रिजिजू ने कहा, कांग्रेस ने खासकर मुस्लिम समुदाय को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से पहले अल्पसंख्यकों की अनदेखी होती थी, लेकिन अब सभी अल्पसंख्यक समुदायों को पूरा महत्व मिल रहा है। मेरी मुस्लिम समुदाय से अपील है कि वे किसी एक पार्टी का वोट बैंक न बनें, क्योंकि यह उनके हित में नहीं है। सरकार ने मिशनरियों की चिंताओं को दूर किया सरकार ने राज्य में ईसाई मिशनरियों के साथ बातचीत कर उनकी चिंताओं को सुना है और संवाद के जरिये समाधान निकालने की कोशिश की है।रिजिजू ने स्पष्ट किया कि एफसीआरए में प्रस्तावित बदलाव किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसका उद्देश्य केवल अवैध विदेशी फंडिंग को रोकना है। जो संस्थाएं नियमों का पालन कर रही हैं, उन्हें किसी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है। रिजिजू ने कहा, सरकार एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर केरल में कांग्रेस और वामदलों की ओर से फैलाए जा रहे झूठ को उजागर करने के लिए तैयार है। पीएम का ईसाई कार्यक्रमों में जाना सिर्फ दिखावा- स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बृहस्पतिवार को विदेशी अंशदान संशोंधन विधेयक को अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बताया और कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खतरा है। नागरकोइल में एक रैली को संबोधित करते हुए स्टालिन ने आरोप लगाया कि हजारों ईसाई स्कूल और कॉलेज इस संशोधन से प्रभावित हो सकते हैं और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की योजना बनाई जा रही है। द्रमुक प्रमुख स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईसाई कार्यक्रमों में शामिल होने को सिर्फ दिखावा बताया। यह बिल धार्मिक आजादी पर हमला है। इस विधेयक के तहत किसी संगठन का एफसीआरए पंजीकरण समाप्त होने, नवीनीकरण न होने या सरकार की ओर से अस्वीकार किए जाने पर उसका प्रमाणपत्र रद्द हो जाएगा। यह भी पढ़ें - Assembly Election 2026: कूचबिहार से आज पीएम मोदी फूंकेंगे चुनावी शंखनाद; विजय ने विपक्षियों पर साधा निशाना विपक्ष सतर्क, संशोधन को पारित नहीं होने देगा- थरूर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एफसीआरए संशोधन विधेयक को वापस लेने की खबरों पर संदेह जताया और कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। केरल के नीलांबुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि जिस तेजी से सरकार इस कानून में बदलाव लाने की कोशिश कर रही थी, वह समझ से परे है। क्या है FCRA संशोधन बिल 2026 FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंड के उपयोग को और सख्त निगरानी में लाना है। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विदेशी पैसे का गलत इस्तेमाल रोका जा सकेगा। इस बिल में ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जिससे संदिग्ध संगठनों की जांच आसान होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई की जा सकेगी। अन्य वीडियो

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 05, 2026, 04:55 IST
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