UP News: सोनभद्र में तीन साल में 199 लोगों की सर्पदंश से मौत... अस्पतालों से लंबी दूरी और झाड़-फूंक बनी वजह
बारिश का सीजन नजदीक आने के साथ ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। पिछले तीन साल में जिले के 199 लोगों ने सर्पदंश से जान गंवाई है। इसमें 80 फीसदी घटनाएं सिर्फ जून से सितंबर के मध्य की हैं। ज्यादातर मामलों में उपचार की जगह झाड़-फूंक ही मौत की अहम वजह बनी है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी सीएचसी और प्रमुख पीएचसी पर एंटी स्नैक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बावजूद इसके लोगों तक उसकी पहुंच नहीं है। ग्रामीण इलाकों में अव्वल तो लोग इसके प्रति जागरूक नहीं हैं और जो जानते हैं, वह गांव से लंबी दूरी और खराब रास्तों के कारण समय से अस्पताल ही नहीं पहुंच पाते। सोनभद्र प्रदेश में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र वाला जिला है। यहां के जंगलों में दुनिया के तीन सबसे खतरनाक सांप भी पाए जाते हैं। लिहाजा सर्पदंश की घटनाएं भी सबसे ज्यादा हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2023-24 में 69 लोगों ने सर्पदंश से जान गंवाई थी। वहीं वर्ष 2024-25 में 62 और 2025-26 में 68 लोगों की मौत हुई है। ये वे मामले हैं, जिनमें पोस्टमार्टम के बाद आपदा राहत कोष से आश्रितों तक आर्थिक मदद पहुंची है। तमाम घटनाओं में लोग पोस्टमार्टम से भी इन्कार कर देते हैं। हर साल बड़ी संख्या में सर्पदंश से हो रही मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटी स्नेक वेनम अस्पतालों पर उपलब्ध कराए गए हैं लेकिन प्रभावित लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। इसकी वजह लोगों में जागरूकता की कमी तो है ही, अस्पतालों से गांवों की लंबी दूरी और खराब रास्ते भी कारण बनते हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड और मप्र के सीमा पर स्थित गांवों से नजदीकी सीएचसी 25-30 किमी दूर है। आवागमन के निजी साधन न हों तो अस्पताल पहुंचने में ही दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए लोग नजदीकी झाड़-फूंक करने वालों की शरण लेने को विवश होते हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 13, 2026, 14:15 IST
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