Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा-भेदभाव ही अन्याय का दूसरा नाम, कर्मचारी को पदोन्नत करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समान परिस्थितियों में एक कर्मचारी को प्रमोशन से वंचित करना, जबकि अन्य को वही लाभ दिया जाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा है कि भेदभाव ही अन्याय का दूसरा नाम है। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें एक सहकारी समिति के कर्मचारी को प्रमोशन देने से इन्कार किया गया था। मामले के मुताबिक, कमल प्रसाद दुबे एक प्राथमिक कृषि सहकारी समिति के कर्मचारी थे, जिन्होंने लगभग 28 वर्षों तक सेवा दी थी। समिति के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने उनकी लंबी सेवा, अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें सोसायटी मैनेजर के पद पर प्रमोशन देने की सिफारिश की थी। साथ ही शैक्षणिक योग्यता में छूट देने का भी प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह कहते हुए प्रमोशन से इन्कार कर दिया कि कर्मचारी के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है। इसके बाद कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब नियमों में शैक्षणिक योग्यता में छूट देने का प्रावधान है, तो सिर्फ डिग्री के अभाव में प्रमोशन से इन्कार करना गलत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वास्तविक न्याय तभी संभव है जब समानता के सिद्धांत का पालन किया जाए। समान योग्यता वालों को पहले ही दिया था प्रमोशन कोर्ट ने यह भी पाया कि समान योग्यता वाले दो अन्य कर्मचारियों को पहले ही प्रमोशन दिया जा चुका था, जबकि अपीलकर्ता को इससे वंचित रखा गया। इसे कोर्ट ने सीधे तौर पर भेदभाव माना। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के वैध निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की एकलपीठ के फैसले को बहाल करते हुए कर्मचारी को प्रमोशन देने का आदेश दिया। पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत को चुनौती पर सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को चुनौती वाली असम सरकार की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी पर आरोप लगाने के मामले में पवन खेड़ा को 10 अप्रैल एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दी थी। जस्टिस जेके माहेश्वरी व जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। बीमादिव्यांगजन के अनुकूल दिशा-निर्देश लागू करने की मांग पर होगी सुप्रीम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को कल्याणकारी बीमा योजनाओं के लिए दिव्यांगजन के अनुकूल दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग वाली याचिका स्वीकार कर ली। शीर्ष अदालत ने याचिका पर केंद्र व एलआईसी को नोटिस जारी किया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में मांग की गई है कि केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए कि दिव्यांजन के लिए कल्याणकारी बीमा योजनाएं संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत दी गई गारंटी के अनुरूप लागू हों। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 21 जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़ा है। पीठ ने सोमवार को इस मामले में नोटिस जारी किया और चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका में एलआईसी को जीवन आधार पॉलिसी समेत कल्याणकारी बीमा योजनाओं के लिए दिव्यांगजन के अनुकूल दिशा-निर्देश तैयार करने और उन्हें लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। एलआईसी की जीवन आधार पॉलिसी उस व्यक्ति को दी जा सकती है जिसका कोई दिव्यांग आश्रित हो और जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80डीडीए में निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो। यह योजना पॉलिसी खरीदने वाले व्यक्ति को उसके पूरे जीवनकाल के दौरान जीवन बीमा सुरक्षा देती है। सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को मिली राहत पर सुप्रीम रोक सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में आरोपियों को एकतरफा अंतरिम जमानत देने वाले राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि गंभीर अपराध में ऐसी राहत देने से पहले सभी पक्षों को सुनना आवश्यक है। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किया है, जिसका जवाब चार सप्ताह में देना होगा। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने 13 अप्रैल को पीड़िता की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पीड़िता ने हाईकोर्ट के 7 अप्रैल, 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। याचिका दाखिल करने में हुई देरी को शुरुआत में ही माफ कर दिया गया था। याचिकाकर्ता के वकील मयंक जैन ने तर्क दिया कि सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए नामजद एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, हाईकोर्ट ने बिना कोई कारण बताए आरोपियों को अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी, जिससे उन्हें इस गंभीर अपराध में गिरफ्तारी से प्रभावी रूप से बचाया जा सका।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 15, 2026, 02:31 IST
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