SC: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादास्पद फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया, कल होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक विवादास्पद फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया है। जिसमें कहा गया था कि सिर्फ छाती पकड़ने और सलवार का नाड़ा खींचने को बलात्कार का अपराध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ इस मामले की सुनवाई बुधवार को करेगी।कानूनी विशेषज्ञों ने दुष्कर्म के आरोप की परिभाषा के बारे में हाईकोर्ट की निंदा की थी, न्यायाधीशों से संयम बरतने की मांग की थी और ऐसे बयानों के कारण न्यायपालिका में जनता के विश्वास में कमी को रेखांकित किया था। हाईकोर्ट का फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 मार्च को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि पीड़िता की छाती पकड़ना और उसके सलवार का नाड़ा खोलना बलात्कार या उसके प्रयास के दायरे में नहीं आता, बल्कि यह गंभीर यौन उत्पीड़न की श्रेणी में माना जाएगा। दरअसल कासगंज की निचली अदालत ने इस मामले में निर्देश दिया था कि आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 18 (रेप के प्रयास) के तहत मामला चले। लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने इस आदेश को बदलते हुए कहा कि आरोपियों पर आईपीसी की धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला) और पॉक्सो एक्ट की धारा 9/10 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत मुकदमा चलाया जाए। हाई कोर्ट की दलील: अदालत ने कहा कि इस मामले में रेप की कोशिश का अपराध सिद्ध नहीं होता, क्योंकि बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाने के लिए यह साबित करना होगा कि घटना तैयारी से आगे बढ़कर अपराध की वास्तविक कोशिश तक पहुंच चुकी थी। कोर्ट ने तैयारी और अपराध करने की कोशिश के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि आरोपियों के कार्य दृढ़ संकल्प के उच्च स्तर को नहीं दर्शाते। SC:'भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए उठाएं कदम', सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली सरकार को आदेश यहां का है मामला मामला कासगंज के पटियाली थाना क्षेत्र का है। चार साल पहले पीड़िता की मां ने 12 जनवरी 2022 को ट्रायल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि 10 नवंबर 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ पटियाली में देवरानी के घर गई थी। उसी दिन शाम को लौटते वक्त गांव के ही पवन, आकाश और अशोक मिल गए। पवन ने बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही। मां ने उस पर भरोसा करते हुए बाइक पर बैठा दिया। रास्ते में पवन और आकाश ने लड़की कोपकड़ लिया और उसके कपड़े उतारने का प्रयास करते हुए पुलिया के नीचे खींचने लगे। मां न दर्ज कराई थी शिकायत लड़की की चीख सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे लोग मौके पर पहुंचे, जिन्हें तमंचा दिखाकर आरोपी धमकी देते हुए फरार हो गए। शिकायत करने आई पीड़िता की मां को भी आरोपी पवन ने गाली-गलौज करते हुए धमकाया। पुलिस के केस नहीं लिखने पर मां ने ट्रायल कोर्ट में अर्जी दी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ सम्मन आदेश जारी किया, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 25, 2025, 21:35 IST
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