Shahjahanpur News: कुर्रियाकलां के प्राचीन देवी मंदिर के कपाट छह माह के लिए हुए बंद
कुर्रियाकलां। गांव के प्राचीन देवी मंदिर के कपाट रविवार को दोपहर बाद धार्मिक अनुुष्ठान के साथ आगामी छह माह के लिए फिर बंद कर दिए गए। इससे पहले, डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह, एसपी राजेश द्विवेदी, एडीएम प्रशासन रजनीश मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट प्रवेंद्र कुमार आदि प्रशासनिक अधिकारियों ने देवी जी का दर्शन और पूजन कर सभी के लिए मंगलकामना की।कपाट बंद होने से पहले देवी जी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के मीडिया प्रभारी विनीत मिश्र सहित भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने भी देवी जी का पूजन किया। बाद में कपाट बंद होने से पहले मंदिर के पुजारी पंडित गुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने देवीजी से स्थान छोड़ने का आवाहन कर उनके विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की। परंपरानुसार पुजारी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मंदिर से मूर्तियों को हटाकर एक अन्य पवित्र स्थान पर सुरक्षित रखवा दिया। इस दौरान मंदिर प्रांगण में कई बच्चों के मुंडन संस्कार भी हुए। वहां लगे मेले में बच्चों ने ऊंट की सवारी का आनंद लिया। बाद में मंदिर परिसर में आयोजित भंडारे में तमाम श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। व्यवस्था में मनुज दीक्षित, पुष्पेंद्र सिंह, राजन मिश्रा, राजेश्वर सिंह, योगेश शर्मा, अमित दीक्षित आदि का सहयोग रहा।---------------------------------सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास से प्रसन्न होते हैं भगवान : अश्विनीखुटार। नगर के देवस्थान मंदिर परिसर में संत योगेश्वर महाराज के निर्देशन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास अश्विनी त्रिपाठी ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा व्यास ने कहा कि सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास से भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।कथा व्यास ने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को मन ही मन पति रूप में स्वीकार किया और उन्हें पाने के लिए दृढ़ संकल्प लिया। रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया, किंतु रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उन्हें अपने साथ ले जाने की प्रार्थना की। भगवान श्रीकृष्ण ने भक्त की पुकार सुनते हुए विदर्भ पहुंचकर रुक्मिणी का हरण किया और बाद में वैदिक विधि से उनका विवाह संपन्न हुआ। संत योगेश्वर महाराज ने बताया कि 31 मार्च को कथा विश्राम होने के साथ ही भंडारे का आयोजन किया जाएगा। संवाद----------------------------------------------फोटो- 35राम-जानकी विवाह का प्रसंग सुनायापुवायां। गांव बिलसड़ी खुर्द में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में कथा व्यास अरविंद दीक्षित ने राम-जानकी विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अरविंद दीक्षित ने सुनाया कि राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो भी शिवजी का धनुष तोड़ेगा, उसके साथ सीताजी का विवाह होगा। तमाम राजा स्वयंवर में आए लेकिन धनुष तोड़ना तो दूर हिला तक न सके। गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष तोड़ दिया और सीताजी ने उनके गले में माला पहनाई। उधर सुरेश चंद्र मिश्र ने भक्त मीरा की कथा सुनाते हुए कहा कि मीरा ने भगवान की भक्ति के बल पर विष पी लिया लेकिन भगवान ने सारा विष हर लिया और मीरा को कुछ नहीं हुआ। भगवान अपने भक्त की रक्षा इस प्रकार करते हैं, जैसे मां अपने बालक की रक्षा करती है और ध्यान रखती है। कथा के बाद आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजक संजय त्रिपाठी, अजय त्रिपाठी, रोहित त्रिपाठी, लक्ष्मीकांत त्रिपाठी सहित काफी संख्या में लोगों ने यज्ञ में भाग लेने के साथ ही कथा का श्रवण किया। संवाद खुटारकेदेवस्थानमंदिरपरिसरमेंकथासुनातेअश्विनीत्रिपाठी।संवाद खुटारकेदेवस्थानमंदिरपरिसरमेंकथासुनातेअश्विनीत्रिपाठी।संवाद
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 29, 2026, 19:26 IST
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