वोदका, चुटकुले और डाइट टिप्स से डील: ट्रंप के खास दूत ने बेलारूस से ऐसे छुड़ाए 500 कैदी; क्या है पूरी कहानी?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे करीबी और बेलारूस के तानाशाह अलेक्सांद्र लुकाशेंको ने बातचीत के दौरान 20 मिनट के भीतर जब यूरोपीय देशों को जमकर कोसना शुरू किया, तो सामने बैठे अमेरिकी डिप्लोमैट ने हंसते हुए गाली दी और कहा कि वो सबके सब डरपोक और कायर हैं। तानाशाह ठहाका मारकर हंसा और रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल गई। टेबल पर लुकाशेंको की पसंदीदा वोदका आई। डिप्लोमैट ने दो पैग गटके और बाकी फर्श पर गिरा दिए ताकि होश में रहकर डील कर सकें। यह कोई फिल्मी जासूसी कहानी नहीं, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत जॉन कोल (79) की कूटनीति है। पारंपरिक कायदे-कानूनों को ताकपर रखकर अश्लील चुटकुले, भद्दे मजाक, वोदका के जाम और वजन घटाने की दवाओं की चर्चा के दम पर कोल ने वो किया जो कोई राजनयिक नहीं कर सका-बेलारूस की जेलों से 500 राजनीतिक कैदियों की रिहाई और सैकड़ों अन्य को माफी। तानाशाह से मुलाकातों के दिलचस्प किस्से तुम पसंद आए, एक कैदी फ्री:पहली मुलाकात में कोल ने वोदका का जाम साझा किया, तो लुकाशेंको इतने खुश हुए कि अमेरिका के मांगे कैदी के अलावा एक अन्य अमेरिकी को भी रिहा करते हुए कहा-इसे मैं सिर्फ इसलिए छोड़ रहा हूं क्योंकि तुम मुझे पसंद आ गए हो। वजन घटाने का राज:जून 2025 में कोल मिन्स्क पहुंचे, तो लुकाशेंको ने देखा कि वह काफी पतले हो गए हैं। कोल ने वेटलॉस इंजेक्शन के बारे में बताया। 6 घंटे बाद बेलारूस की मुख्य विपक्षी नेता श्वेतलाना के पति समेत 14 नेताओं रिहा हो गए। जब ट्रंप ने खुद अलास्का से मिलाया फोन: कामयाबी के बाद कोल व उनकी पत्नी ने ट्रंप के साथ डिनर किया। ट्रंप इतने प्रभावित हुए कि अलास्का जाते वक्त विमान से लुकाशेंको को फोन मिलाकर व्हाइट हाउस आमंत्रित किया। वैन का दरवाजा खुला कैदी गले लगकर रो पड़े:2020 के प्रदर्शन कवर करने के जुर्म में 8 साल की सजा काट रहीं पत्रकार कात्सियारिना आंद्रेयेवा को जब जेल से लाया गया, तो वैन का दरवाजा खुद जॉन कोल ने खोला और कहा-आप आजाद हैं। आंद्रेयेवा ने कोल को गले लगा लिया। कोल कहते हैं, आजाद होते कैदियों के चेहरे का भाव देखना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत है। ये भी पढ़ें:अमेरिका पर कनाडा का पलटवार:8 सितंबर से लगाएगा जवाबी टैरिफ, पीएम मार्क ने किया एलान; क्यों बढ़ा विवाद भोपाल गैस कांड से जुड़े केस में निभाई अहम भूमिका बाल्टीमोर निवासी जॉन कोल करियर डिप्लोमैट नहीं, बल्कि चर्चित वकील रहे हैं। 1984 के भोपाल गैस कांड के पीड़ितों की तरफ से उन्होंने अदालत में पैरवी की थी। गैस कांड के कुछ दिन बाद अमेरिकी वकील जॉन कोल अपने सहयोगी आर्थर लोवी के साथ भोपाल पहुंचे। दिसंबर 1984 तक उनकी टीम करीब 7,000 पीड़ितों से रिटेनर एग्रीमेंट करा चुकी थी। कोल ने अमेरिकी कोर्ट में यूनियन कार्बाइड के खिलाफ पीड़ितों की ओर से बड़े दावे की तैयारी की। अमेरिकी वकीलों की सक्रियता की भारत में खूब आलोचना भी हुई। 29 मार्च 1985 को भारत ने भोपाल गैस विभीषिका अधिनियम पारित किया। इससे केंद्र को पीड़ितों की ओर से भारत और विदेश में दावे करने का अधिकार मिला।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 23, 2026, 02:13 IST
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