अमेरिका: एआई निवेश से मिल रहा अर्थव्यवस्था को सहारा, रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी; आम लोगों की जेब पर कितना असर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया में सबसे मजबूत बता रहे हों, लेकिन आर्थिक आंकड़े एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और घरेलू आय में भी इजाफा हुआ है, मगर महंगाई, धीमी होती रोजगार वृद्धि, महंगे आवास और बढ़ते सरकारी कर्ज ने आम अमेरिकी परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में बड़े निवेश से आर्थिक विकास को सहारा मिल रहा है, लेकिन यह तेजी कितनी टिकाऊ होगी, इस पर भी सवाल हैं। हाउ इज द यूएस इकोनॉमी रियली डूइंग अंडर प्रेसिडेंट ट्रंप में बीबीसी वेरिफाई ने आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ट्रंप सरकार के आर्थिक दावों की पड़ताल की है। विकास दर मजबूत, एआई निवेश से मिल रहा सहारा बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वार्षिकीकृत विकास दर 2.2 प्रतिशत है। वर्ष 2024 के अंत से अब तक अर्थव्यवस्था का आकार करीब 3.2 प्रतिशत बढ़ा है। इस अवधि में अमेरिका की विकास दर जी-7 समूह की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर रही है।अप्रैल 2025 में ट्रंप ने आयातित वस्तुओं पर व्यापक शुल्क लगाने की घोषणा की थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के विकास अनुमान घटाए थे। आशंका थी कि आयात शुल्क बढ़ने से निवेश और उपभोक्ता खर्च प्रभावित होंगे। हालांकि, बाद में ट्रंप प्रशासन ने कई शुल्कों में ढील दी, जिससे संभावित आर्थिक नुकसान का असर कुछ कम हुआ। अर्थव्यवस्था को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े निवेश का भी फायदा मिल रहा है। अमेरिकी कंपनियां एआई के लिए डेटा सेंटर बनाने पर भारी खर्च कर रही हैं। अगस्त 2026 में डेटा सेंटर निर्माण पर कंपनियों का मासिक खर्च करीब पांच अरब डॉलर रहा, जो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय के मुकाबले लगभग दोगुना था। हालांकि, इस निवेश में कमी आने पर आर्थिक विकास की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। महंगाई फिर बढ़ी, ईंधन की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी अमेरिका में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह वर्ष 2022 में दर्ज नौ प्रतिशत के उच्च स्तर से काफी नीचे है, लेकिन जनवरी 2025 में ट्रंप को विरासत में मिली तीन प्रतिशत की दर से अधिक है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि ट्रंप की ओर से लगाए गए नए आयात शुल्कों के बिना महंगाई कम रह सकती थी। इसके अलावा, ईरान के साथ युद्ध और मध्य पूर्व से तेल एवं ईंधन आपूर्ति में बाधा ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को बढ़ाया है। इसका असर अमेरिकी बाजार पर भी पड़ा है।सितंबर 2026 में अमेरिका में डीजल की कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। डीजल का इस्तेमाल परिवहन के साथ कृषि और उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। बीफ और कॉफी जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ी हैं, हालांकि अंडों के दाम में गिरावट आई है। ऊर्जा की बढ़ती लागत से खाद्य उत्पादन महंगा होने की आशंका है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। आय बढ़ी, लेकिन मध्यमवर्ग को पूरा फायदा नहीं अमेरिकी परिवारों की महंगाई-समायोजित मध्य आय 2025 में 2.6 प्रतिशत बढ़कर 87,460 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। लेकिन आय में इस बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि सभी वर्गों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।इंस्टीट्यूट ऑन टैक्सेशन एंड इकोनॉमिक पॉलिसी के आकलन के मुताबिक, ट्रंप की कर कटौती, स्वास्थ्य बीमा पर अतिरिक्त सरकारी सब्सिडी की समाप्ति और अनुमान से अधिक महंगाई के संयुक्त प्रभावों ने परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। संस्थान का अनुमान है कि 2026 में मध्यम आय वर्ग के 20 प्रतिशत परिवार औसतन 1,700 डॉलर और सबसे कम आय वाले 20 प्रतिशत परिवार करीब 750 डॉलर की स्थिति में नुकसान में हैं। इसके विपरीत, सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों को औसतन 12,560 डॉलर का लाभ होने का अनुमान है। इसकी प्रमुख वजह ट्रंप की कर कटौती बताई गई है। नौकरियां बढ़ने की रफ्तार हुई धीमी ट्रंप ने आयात शुल्कों के पक्ष में तर्क दिया था कि इससे कंपनियां अमेरिका में कारखाने लगाएंगी और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। लेकिन अब तक रोजगार के आंकड़े इस दावे की पूरी पुष्टि नहीं करते।ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हर महीने औसतन 34 हजार नौकरियां जुड़ीं। यह बाइडन के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम वर्ष में हर महीने जुड़ने वाली औसतन 1.22 लाख नौकरियों से काफी कम है। सितंबर 2026 में विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार पाने वालों की संख्या 1.26 करोड़ थी, जो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के मुकाबले थोड़ी कम है।हालांकि, बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत पर बनी हुई है।बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इसका एक कारण ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति और निर्वासन कार्यक्रम भी है। इससे उपलब्ध श्रमबल का आकार घटा है और बेरोजगारी दर स्थिर रखने के लिए हर महीने पहले की तुलना में कम नई नौकरियों की जरूरत पड़ सकती है। ये भी पढ़ें:शांति प्रस्ताव: ईरान-अमेरिका में इस हफ्ते सहमति संभव, छह अरब डॉलर के फंड में मिल सकती है रियायत बढ़ता सरकारी कर्ज, महंगे होम लोन अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सामने एक और बड़ी चुनौती सरकारी घाटा और बढ़ता कर्ज है। सितंबर 2026 तक समाप्त वर्ष में संघीय बजट घाटा करीब दो लाख करोड़ डॉलर रहा, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग छह प्रतिशत है। अनुमान है कि 2030 तक यह अनुपात आठ प्रतिशत से ऊपर जा सकता है।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अत्यधिक सरकारी उधारी और तेजी से बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज को भविष्य में वित्तीय संकट के जोखिम से जोड़ा है। सरकारी उधारी बढ़ने से वित्तीय बाजारों में अमेरिका के लिए कर्ज लेना महंगा हुआ है।ट्रंप के जनवरी 2025 में सत्ता संभालने के बाद 10 वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़कर पांच प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है। वहीं, नए 30 वर्षीय होम लोन की ब्याज दर 6.9 प्रतिशत से बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो गई है। इससे नए घर खरीदना महंगा हुआ है। जिन लोगों ने पहले कम ब्याज दर पर कर्ज लिया था, वे भी घर बदलने से बच रहे हैं, क्योंकि नई संपत्ति खरीदने पर उन्हें अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। विकास के आंकड़े और आम लोगों का अनुभव अलग अमेरिकी अर्थव्यवस्था में वृद्धि, रिकॉर्ड मध्य घरेलू आय और एआई निवेश इसकी मजबूती के संकेत हैं। लेकिन महंगाई, रोजगार सृजन की धीमी गति, महंगे आवास और बढ़ते सरकारी कर्ज से पता चलता है कि आर्थिक विकास का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा। ट्रंप के आर्थिक प्रदर्शन का वास्तविक आकलन इस बात से भी होगा कि आने वाले समय में विकास की रफ्तार कितनी टिकाऊ रहती है और आम परिवारों की क्रय शक्ति में कितना सुधार होता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 21, 2026, 07:08 IST
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