Budget: कौशल विकास के लिए सरकार ने खोला खजाना, बच्चे सीखेंगे कंटेंट बनाना

बजट में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कौशल विकास के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। इसके बजट में 62 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने और उभरते क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षण का विस्तार करने की रणनीति पर भी जोर दिया गया है। उच्च शिशा और विशेषतौर पर स्टेम यानी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में बेटियों की भागीदारी को बढ़ाने और स्थायी करने के लिए देश के सभी 800 जिलों में उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े महिला छात्रावास के निर्माण का प्रस्ताव किया गया है। इससे, दूरदराज व ग्रामीण इलाकों की बेटियों को सबसे अधिक लाभ होगा, जिन्हें रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिलने की वजह से बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। शिक्षा बजट में की गई बढ़ोतरी इस बार स्कूल और उच्च शिक्षा बजट में 8.27 फीसदी और कौशल विकास के बजट में 62 फीसदी की वृद्धि की गई है। दोनों का समग्र बजट बढ़कर करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। स्कूल व उच्च शिक्षा के लिए 1,39,289.48 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसमें स्कूल व साक्षरता विभाग को 83,562.26 करोड़ रुपये (6.35 फीसदी) और उच्च शिक्षा विभाग का 55,727.22 (11.28 फीसदी) करोड़ रुपये मिले हैं। कौशल विकास के लिए 9,885.80 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। पहली बार बजट में स्कूल स्तर पर ही छात्रों को शिक्षा, कौशल, साइंस, एआई व क्वांटम समेत उभरती तकनीक और प्रौद्योगिकी से जोड़ने और प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार के लिए तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। खगोल-भौतिकी और खगोल विज्ञान में छात्रों की रूचि बढ़ाने के लिए नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप, नेशनल लार्ज ऑप्टिकल इन्फ्रारेड टेलिस्कॉप, हिमालयन चंद्र टेलिस्कॉप और द कॉसमॉस-2 प्लेनेटोरियम जैसे बुनियादी सुविधा केंद्र खोले जाएंगे। 15 हजार स्कूलों में बनाई जाएंगी एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स और गेमिंग तेजी से बढ़ रही देश में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स यानी एवीजीसी क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। देश की रचनात्मक अर्थव्यवस्था यानी ऑरेंज इकॉनमी को मजबूत करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (मुंबई) की मदद से देशभर के 15 हजार माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएंगी। इन लैब में छात्रों को एनीमेशन, डिजिटल कंटेंट, गेमिंग और अन्य रचनात्मक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। इससे युवा कम उम्र में ही नए कौशल सीख सकेंगे और आगे चलकर रोजगार या स्टार्टअप शुरू करने के अवसर बढ़ेंगे। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक करीब 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योजना बनाई है। पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाए जाएंगे युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए देश के पांच प्रमुख लॉजिटिक्स केंद्रों के आसपास विश्वविद्यालय टाउनशिप स्थापित किए जाएंगे। यहां पर आवासीय विश्वविद्यालय और कॉलेजों के अलावा शोध संस्थान, कौशल केंद्र बनाए जाएंगे। छोटे शहर के युवा बनेंगे कॉरपोरेट मित्र कैडर टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के युवाओं को रोजगार से जोड़ने को सीए, सीएस और सीएमए संस्थान मदद करेंगे। शार्ट टर्म कोर्स और प्रैक्टिकल टूल्स की ट्रेनिंग से लघु उद्योगों को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। इन मान्यता प्राप्त पेशेवरों को कॉरपोरेट मित्र कैडर कहेंगे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 02, 2026, 04:26 IST
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