UPI: आठ देशों में यूपीआई सेवाओं का बज रहा डंका, 23 देशों से करार और जनवरी में लेनदेन का रिकॉर्ड; जानिए सबकुछ
भारत का 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (डीपीआई) अब केवल सफलता की घरेलू कहानी नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक कूटनीति और तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व का एक शक्तिशाली उपकरण बन गया है। सरकार ने शुक्रवार को संसद में बताया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), फ्रांस और सिंगापुर सहित आठ से अधिक देशों में लाइव हो चुका है। इसके साथ ही, भारत ने अपने 'इंडिया स्टैक' और डीपीआई मॉडल को साझा करने के लिए दुनिया के 23 देशों के साथ समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यूपीआई का वैश्विक विस्तार: फ्रांस से लेकर भूटान तक संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत का लोकप्रिय भुगतान प्लेटफॉर्म यूपीआई अब निम्नलिखित देशों देशों में पूरी तरह से सक्रिय है: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सिंगापुर भूटान नेपाल श्रीलंका फ्रांस मॉरीशस कतर राज्य मंत्री ने बताया कि यूपीआई के इस बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रसार से न केवल रेमिटेंस को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि यह वित्तीय समावेशन को भी प्रोत्साहित कर रहा है। यह कदम भारत को वैश्विक डिजिटल भुगतान बाजार में एक लीडर के रूप में स्थापित कर रहा है। 23 देशों के साथ रणनीतिक समझौते सरकार ने 'इंडिया स्टैक' ढांचे के तहत डीपीआई को अपनाने और इसे दोहराने के लिए 23 देशों के साथ समझौतों या एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। जितिन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि ये समझौते भारत की व्यापक 'डीपीआई कूटनीति' के अनुरूप हैं। इन समझौतों का मुख्य फोकस निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग पर है: डिजिटल पहचान डिजिटल भुगतान डेटा एक्सचेंज सेवा वितरण प्लेटफॉर्म विशेष रूप से, 'डिजिलॉकर' के लिए क्यूबा, केन्या, यूएई और लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के साथ एमओयू साइन किए गए हैं। इंडिया स्टैक ग्लोबल और जी20 की विरासत सरकार ने भारत के डीपीआई की सफलता को वैश्विक स्तर पर साझा करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। 'इंडिया स्टैक ग्लोबल' पोर्टल के माध्यम से 18 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया गया है ताकि मित्र देश उन्हें अपना सकें। इसके अलावा, भारत की जी20 अध्यक्षता (2023) के दौरान लॉन्च किया गया 'ग्लोबल डीपीआई रिपॉजिटरी' एक वैश्विक ज्ञान मंच के रूप में कार्य कर रहा है। मंत्री ने बताया कि भारत इस रिपॉजिटरी में डीपीआई समाधानों का सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। प्रमुख डीपीआई और डिजिटल समाधानों में आधार, यूपीआई, कोविन, एपीआई सेतु, डिजिलॉकर, आरोग्य सेतु, जीईएम, उमंग, दीक्षा, ई-संजीवनी और पीएम गतिशक्ति शामिल हैं। जनवरी में यूपीआई ने तोड़े रिकॉर्ड घरेलू मोर्चे पर भी यूपीआई की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन में जबरदस्त उछाल देखा गया है: ट्रांजैक्शन की संख्या: जनवरी में कुल 21.70 बिलियन (2,170 करोड़) लेनदेन हुए, जो सालाना आधार पर 28% की वृद्धि दर्शाता है। ट्रांजैक्शन की वैल्यू: राशि के मामले में भी 21% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई और यह आंकड़ा 28.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। संसद में पेश किए गए ये आंकड़े और जनवरी का प्रदर्शन यह बताते हैं कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब वैश्विक मानकों को परिभाषित कर रहा है। जहाँ एक तरफ यूपीआई घरेलू अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया है, वहीं दूसरी तरफ यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की 'सॉफ्ट पावर' का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 06, 2026, 18:34 IST
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