ईरान पर US के दो सुर: ट्रंप-रुबियो के विरोधाभासी बयानों से ईरान युद्ध पर बढ़ी अनिश्चितता, जानें किसने क्या कहा

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर ही अलग-अलग संकेत सामने आने लगे हैं। एक तरफ विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि अभियान अपने लक्ष्य हासिल करने के बाद समाप्त हो चुका है और अब वॉशिंगटन वार्ता के जरिए समाधान चाहता है। दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान प्रस्तावित समझौते पर सहमत नहीं हुआ तो सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं और उनकी तीव्रता पहले से अधिक होगी। इसी बीच होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया अमेरिकी मिशन प्रोजेक्ट फ्रीडम भी फिलहाल रोक दिया गया है। इन घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया में तनाव अभी समाप्त नहीं हुआ, बल्कि अब संघर्ष सैन्य मोर्चे से कूटनीतिक दबाव की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। अल जजीरा व अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का उद्देश्य पूरा हो चुका है और अमेरिका अब किसी नए सैन्य टकराव के बजाय समझौते का रास्ता तलाशना चाहता है। उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई प्रारंभिक वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी, पर दोनों देशों ने बाद में नए प्रस्ताव एक-दूसरे को भेजे हैं। रुबियो के अपेक्षाकृत नरम बयान के तुरंत बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, ऑपरेशन तभी पूरी तरह समाप्त माना जाएगा जब ईरान तय शर्तों को स्वीकार करेगा। अगर वार्ता विफल हुई तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। होर्मुज जलमार्ग क्यों बना सबसे बड़ा संकट इस पूरे संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र होर्मुज जलमार्ग है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद यहां जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। अमेरिका ने जवाब में प्रोजेक्ट फ्रीडम नाम का अभियान शुरू किया था ताकि फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके। ट्रंप ने अब इसे अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है, ताकि बातचीत शुरू हो सके। हालांकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया नौसैनिक दबाव और प्रतिबंध जारी रखने का फैसला किया है। क्या यह युद्ध का अंत है या सिर्फ अस्थायी विरामपश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम युद्ध के पूर्ण अंत की गारंटी नहीं देते, लेकिन यह संकेत जरूर देते हैं कि सभी पक्ष फिलहाल बड़े सैन्य टकराव से बचना चाहते हैं। ऑस्ट्रेलिया की डीकिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शाहराम अकबरजादेह के अनुसार, प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोकना इस संघर्ष के धीरे-धीरे खत्म होने की शुरुआत हो सकता है क्योंकि ईरान भी लंबे युद्ध से बाहर आना चाहता है। हालांकि पहले भी कई बार बातचीत की संभावनाएं बनीं पर वे सफल नहीं हो सकीं। अमेरिकी सेना ने ईरानी तेल टैंकर को बनाया निशाना अमेरिका सेना ने बुधवार को ओमान की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया। इसमें टैंकर के पतवार को क्षति पहुंची है। अमेरिका ने बताया कि ईरानी टैंकर ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। चेतावनी देने के बाद भी जब ईरानी टैंकर ने नाकाबंदी का उल्लंघन करना जारी रखा तो उस पर हमला किया गया। इस घटना से दोनों देशों में तनाव बढ़ सकता है जो युद्ध समाप्त करने के लिए प्रारंभिक समझौते के करीब पहुंचते दिख रहे हैं। इससे पहले ईरानी मीडिया ने ड्रोन के जरिए एक अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने का दावा किया था, जिसे अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने नकार दिया था।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 07, 2026, 02:19 IST
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