सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मामला: गुजरात हाईकोर्ट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान की याचिका खारिज, पूरा मामला क्या?

गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान की याचिका खारिज कर दी। पठान ने अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया था। यह याचिका पिछले साल अगस्त में एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ थी, जिसमें उन्हें वडोदरा में सरकारी जमीन पर "अतिक्रमणकारी" बताया गया था। दो जजों की पीठ के समक्ष वकील की दलील क्या पठान के वकील शालीन मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की खंडपीठ से याचिका वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि राज्य की नीति के तहत उनके दावे पर अभी भी विचार किया जा रहा है। खंडपीठ ने याचिका को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया। पठान ने गुजरात सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) की 978 वर्ग मीटर जमीन के आवंटन का उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया था। अदालत नेचेतावनी दी थी पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ने राज्य की नीति के तहत इस जमीन पर दावा किया था। पिछली सुनवाई में, 43 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने अदालत को बताया था कि वह राज्य सरकार की योजना के तहत जमीन पर अपना दावा कर रहे हैं। उन्हें इसके लिए समय भी दिया गया था। हाई कोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी थी कि जमीन खाली करने में अधिक समय लगने पर उन्हें अधिक हर्जाना देना होगा। वकील ने याचिका वापसी पर क्या तर्क दिए सोमवार को पठान के वकील ने अदालत को बताया कि वे वीएमसी के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें नगर निकाय अधिकारियों से कोई जानकारी नहीं मिली है। मेहता ने कहा कि एक परिपत्र है जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को भूखंड देने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि वीएमसी से कोई जवाब न मिलने के कारण वे याचिका वापस ले रहे हैं। मेहता ने बताया कि उनके मुवक्किल के निर्देश हैं कि यदि यह मामला अदालत के बाहर सुलझता है तो ठीक, अन्यथा नहीं। अतिक्रमण पर नगर निगम के नोटिस में क्या 2024 में उनका दावा खारिज होने के बावजूद, पठान ने संबंधित जमीन पर कब्जा जारी रखा। 2024 में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुने जाने के बाद वीएमसी ने उन्हें जमीन खाली करने की सूचना भेजी। पठान ने इस सूचना को मानने से इन्कार कर दिया और मामले को अदालत में चुनौती दी। 8 जून को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने भूखंड पर "अतिक्रमण" को लेकर पठान की कड़ी आलोचना की थी। अदालत ने मौखिक रूप से पूछा था कि वह बिना किसी औपचारिकता के जमीन पर कैसे कब्जा कर सकते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 01, 2026, 04:16 IST
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