West Asia Live: पाकिस्तान में US-ईरान वार्ता आधी रात के बाद भी जारी; ट्रंप बोले- समझौते से कोई फर्क नहीं पड़ता

पाकिस्तान में रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी है। दो हफ्ते के अस्थायी संघर्षविराम की घोषणा के कुछ दिन बाद यह वार्ता हो रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष सातवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। अमेरिकी सेना ने कहा कि उसके दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे हैं, जो खाड़ी युद्ध क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को हटाने की तैयारी से पहले हुआ है। लेकिन ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा कि ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, हम होर्मजु जलडमरूमध्य को खाली कर रहे हैं। चाहे समझौता हो या न हो, मेरे लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बयान तब आया, जब बातचीत चल रही थी और इस्लामाबाद में समय करीब 2 बजे रात का हो रहा था। ट्रंप ने माना कि गंभीर वार्ता चल रही है। वहीं, ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कहा कि बातचीत में 'गंभीर' मतभेद हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं और ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने पाकिस्तान के साथ मिलकर संघर्षविराम को आगे बढ़ाने पर चर्चा की है। लेकिन यह संघर्षविराम गहरे मतभेदों और इस्राइल के लगातार हमलों से दबाव में है। इन हमलों में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को भी नुकसान हुआ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मौत का आंकड़ा 2,000 से अधिक हो चुका है। 1979 की ईरान इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संपर्क 2013 में हुआ था, जब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नए चुने गए राष्ट्रपति हसन रूहानी से बात की थी। बाद में 2015 के ईरान परमाणु समझौते की बातचीत के दौरान विदेश मंत्री जॉन केरी और ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ मिले थे। यह प्रक्रिया एक साल से ज्यादा चली थी। ईरान की 'शर्तें' ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने कहा कि त्रिपक्षीय वार्ता ईरान की पूर्व शर्तों के बाद शुरू हुई, जिनमें दक्षिण लेबनान में इस्राइली हमलों को रोकना भी शामिल था। ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ बैठक में शर्तें रखीं। इनमें युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा और अमेरिका-इस्राइल की ओर से जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। इस युद्ध में अब तक ईरान में कम से कम 3,000 लोग मारे गए हैं। लेबनान में 2,020, इस्राइल में 23 और खाड़ी देशों में दर्जनों लोग मारे गए हैं। साथ ही कई खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण ने खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस निर्यात को काफी हद तक वैश्विक बाजार से काट दिया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि चीन, मिस्र, सऊदी अरब और कतर के अधिकारी इस्लामाबाद में मौजूद हैं, ताकि बातचीत को अप्रत्यक्ष रूप से आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। पोप लियो चौदहवें ने की युद्ध की निंदा तेहरान में लोगों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि वे हालात को लेकर संशय में हैं, लेकिन उम्मीद भी रख रहे हैं, क्योंकि हफ्तों की बमबारी ने 9.3 करोड़ की आबादी वाले देश में भारी तबाही मचाई है। 62 वर्षीय आमिर रजाई फार ने कहा, शांति अकेले काफी नहीं है क्योंकि हमारे देश को बहुत नुकसान हुआ है। भारी कीमत चुकानी पड़ी है। पोप लियो चौदहवें ने भी इस युद्ध की निंदा की है। उन्होंने बताया कि 'सर्वशक्तिमान होने का भ्रम' है, जो इस संघर्ष को बढ़ा रहा है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 12, 2026, 04:30 IST
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