AI समय: तकनीक से डरें नहीं, तैयार रहें; सिर्फ आशंकाएं नहीं... अवसर भी देखिए

पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों व्यावसायिक नेतृत्वकर्ताओं के साथ बातचीत के दौरान, मैंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर उनके विचारों में एक बड़ा अंतर देखा है। एक पक्ष को आगे नौकरियों का खात्मा और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी नजर आती है; वहीं दूसरा पक्ष इसे एक बड़ी छलांग के तौर पर देखता है। क्या एआई वाकई श्रम बाजार में उथल-पुथल मचा देगा जवाब है, बिल्कुल। हमारे इतिहास के दूसरे अहम पड़ावों की तरह, यह बदलाव भी नई चुनौतियां लेकर आएगा। खासकर तब, जब एआई श्रम को उत्पादकता से इस हद तक अलग कर देगा, जैसा हमने पहले कभी नहीं देखा। पर, इतिहास रहा है कि किसी भी बड़े बदलाव के जवाब में नए रोजगार पैदा होते हैं-1900 के दशक में बिजली आने से लेकर 1990 के दशक की डिजिटल क्रांति तक। इसलिए, मुझे कोई वजह नजर नहीं आती कि यह सिलसिला अब रुक जाएगा। गोल्डमैन सैश के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगले दस वर्षों में, एआई मौजूदा काम के घंटों में से 25 प्रतिशत को स्वचालित कर सकता है। स्टैनफोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार, जिन पेशों में स्वचालन (ऑटोमेशन) की संभावना सबसे ज्यादा है (जैसे कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या कस्टमर सर्विस) वहां प्रवेश स्तर की नौकरियों में पहले ही 16 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। लेकिन, जब आप उन नौकरियों या क्षेत्रों को देखते हैं, जिनका स्वचालन से कम लेना-देना है, तो तस्वीर बदल जाती है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि डाटा सेंटरों की बढ़ती मांग की वजह से 2022 से अब तक 2,00,000 से ज्यादा निर्माण क्षेत्र में नौकरियां पैदा हुई हैं। जहां एक तरफ एआई कुछ सेक्टरों में नौकरियां खत्म करता है, वहीं दूसरी तरफ यह कुछ अन्य सेक्टरों में नौकरियों में बढ़ोतरी का कारण भी बन सकता है। बेशक, हम ऐसे व्यवधान से होने वाले मानवीय नुकसान को नजरअंदाज नहीं कर सकते। हाल के दशकों में, ऑटोमेशन और वैश्विक आउटसोर्सिंग के कारण विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार में काफी गिरावट आई है। पर, तमाम चुनौतियों के बावजूद, ज्यादातर लोगों का जीवनस्तर पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो गया है। तीन ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से मुझे उम्मीद है कि एआई अर्थव्यवस्था को मजबूत और गतिशील बनाएगा। पहला, अगर मेरा अनुमान सही साबित होता है, तो एआई 25 प्रतिशत नौकरियां खत्म नहीं करेगा। ज्यादा संभावना है कि लोग अपना समय बिताने के ज्यादा उत्पादक तरीके ढूंढ लेंगे। ज्यादा उन्नत उपकरणों के साथ, हमारे काम की जटिलता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। क्या हममें से किसी को भी आजकल ऐसा लगता है कि एक्सेल, ई-मेल या जूम की सुविधा होने के बावजूद, हमारे पास करने के लिए कम काम है दूसरा, सिर्फ इसलिए कि एआई किसी नौकरी की जगह ले सकता है, इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा होगा ही। टीवी ने लाइव मनोरंजन की मांग को खत्म नहीं किया और न ही इंटरनेट ने रियल एस्टेट एजेंटों या फिटनेस प्रशिक्षकों का काम-धंधा बंद करवाया। इसके बजाय, इन तकनीकों ने उन पेशों के महत्व को और भी ज्यादा उभारा और बढ़ाया ही है। तीसरा, यह अंदाजा लगाना आसान है कि जैसे-जैसे एआई की मदद से और भी ज्यादा नवाचार होंगे, नौकरियों के पैदा होने की रफ्तार और भी तेज हो जाएगी। कंपनियां अब ऐसे लोगों की तलाश कर रही हैं, जो तथाकथित एजेंटिक एआई को प्रबंधित कर सकें और इसे अलग-अलग क्षेत्रों में शामिल कर सकें-अमल करने और कार्यप्रवाह से लेकर अनुपालन और सत्यापन तक। इन सभी कामों के लिए मानवीय सूझ-बूझ की जरूरत होती है। अगर एआई सचमुच बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म करने लगे (और शायद हमारी उम्मीद से भी तेजी से), तो सरकारों और नीति बनाने वालों को इसके लिए कदम उठाने होंगे। उन्हें या तो लोगों को नए कौशल (री-स्किलिंग) सिखाने पर बड़े स्तर पर निवेश करना होगा, या फिर ऐसे एआई को बढ़ावा देना होगा, जो कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय उनके काम को आसान और बेहतर बनाए। यह एक संयुक्त प्रयास होना चाहिए। सार्वजनिक क्षेत्र को प्रोत्साहन देकर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए, जिसमें व्यावसायिक स्कूलों और कम्युनिटी कॉलेजों में ज्यादा निवेश करना भी शामिल है। वहीं, निजी क्षेत्र को कर्मचारियों के कौशल को बेहतर बनाने और काम के दौरान उन्हें मिलने वाली ट्रेनिंग को नए सिरे से सोचने में मदद करनी चाहिए। - ©The New York Times 2026

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 27, 2026, 08:17 IST
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